अफ़ज़ल गुरु की फांसी पर उमर के बयान से हड़कंप

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उमर अब्दुल्ला के अफ़जल गुरू पर दिए गए बयान पर सोशल मीडिया में हड़कंप मचा हुआ है.

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था कि चरमपंथी अफ़ज़ल गुरू को सियासी वजहों से फांसी पर लटकाया गया था.

ट्विटर पर कई लोगों ने उमर के बयान का विरोध किया है तो कुछ लोगों का आरोप है कि भारत में पहले भी हिंदू वोट बैंक को खुश करने के लिए ऐसे फैसले हुए हैं.

पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उमर के इस बयान का खंडन करते हुए कहा, "अफ़ज़ल गुरु को राजनीतिक कारणों से फांसी पर नहीं लटकाया गया था."

अफ़ज़ल गुरु को 2001 में भारतीय संसद पर हुए चरमपंथी हमले में दोषी पाया गया था. उसके बाद फ़रवरी 2013 में उन्हें फांसी दी गई थी.

मोदी पर निशाना साधा

उमर अब्दुल्ला ने पीटीआई से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए कहा, "विदेश जाकर विपक्ष को निशाना बनाना या ये कहना कि जब तक मैं पीएम नहीं बना था, तब तक लोग ख़ुद को भारतीय बताने पर शर्मिंदा होते थे जैसे बयानों के पक्ष में मैं नहीं हूँ. ये बयान मोदी के (अहंकार) मैं, मेरा और केवल मैं वाले व्यक्तित्व को दिखाते हैं."

दूसरी ओर, उन्होंने कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि 56 दिनों के बाद जो राहुल लौटे हैं वो पहले वाले राहुल से बिल्कुल अलग हैं.

'शिंदे ने किया फ़ोन'

अफ़ज़ल गुरु वाली घटना पर अब्दुल्ला ने कहा कि वे अपनी बहन के साथ दिल्ली के एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे जब शिंदे ने उन्हें फ़ोन कर कहा कि अगली सुबह अफ़ज़ल को फांसी पर चढ़ाया जाएगा. यह घटना फ़रवरी 2013 की है.

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अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने शिंदे से पूछा कि क्या अब कुछ नहीं किया जा सकता? उमर के मुताबिक शिंदे ने कहा कि उन्होंने फांसी दिए जाने से जुड़े काग़ज़ात पर दस्तख़त कर दिए हैं.

अब्दुल्ला ने कहा, “हमें अच्छा लगे या बुरा, पर यह सच है कि गुरू को राजनीतिक कारणों से ही फांसी दी गई थी.”

उमर के बयान पर एक यूजर आलोक ने हैंडल @alokmu से लिखा ,“अब्दुल्ला अफ़ज़ल गुरू के समर्थन में धरने पर क्यों नहीं बैठ जाते? वे अपने को पाकिस्तान समर्थक क्यों नहीं घोषित कर देते?”

एक यूजर गुरिंदर अहलूवालिया ने ट्वीट किया, "राजनीतिक पार्टियों के हिंदू वोट बैंक को खुश करने के लिए फांसी पर लटकाए जाने वाले अफ़ज़ल गुरु इकलौते व्यक्ति नहीं हैं. ये पाप है."

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एक यूजर आर सरोजा ने हैंडल @rsaroja70 पर लिखा, “अब्दुल्ला यह बताएं कि संसद पर हुए हमले में अफ़ज़ल गुरू की क्या भूमिका थी.”

एक यूजर ने हैंडल ‏@NitiCentral) पर इसे उमर अब्दुल्ला का ‘सेकंड थॉट’ क़रार दिया.

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