राजस्थान में है एक हरा-भरा श्मशान

भीलवाड़ा का श्मसान घाट इमेज कॉपीरइट SHYAM SUNDAR JOSHI

हरे-भरे पेड़ों वाला बेहद साफ़-सुथरा यह परिसर श्मशान घाट है, जहां मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है.

राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मुक्तिधाम में लोग सिर्फ दाह संस्कार के लिए ही नहीं बल्कि सुकून के दो पल की तलाश में भी आते हैं.

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करीब 15 बीघा सरकारी ज़मीन में स्थित इस मुक्तिधाम की देख-रेख वर्ष 2007 से पंचमुखी मुक्तिधाम विकास ट्रस्ट द्वारा की जाती है.

मुक्तिधाम को इतना सुंदर बनाने में स्थानीय पर्यावरण प्रेमी बाबूलाल जाजू का बड़ा हाथ रहा है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि जब वो 19 साल पहले जामनगर, गुजरात गए थे तो उनके मेज़बान ने उन्हें वहाँ की झील दिखाने के बाद मुक्तिधाम दिखाने की पेशकश की तो वे चौंक गए.

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पर जब मुक्तिधाम का शांत वातावरण देखा तो उन्हें भी धुन लग गई कि क्यों न भीलवाड़ा में भी ऐसा किया जाए.

उन्होंने अपने ही जैसे शहर के कुछ लोगों को साथ लिया और काम शुरू कर दिया. जल्दी ही एहसास भी हुआ कि यह यह कोशिश थोड़ी मुश्किल है लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

उनके मुताबिक़, शुरू में खुद के खर्च से सफाई और पानी का इंतजाम किया. नीम, बरगद, गुलमोहर जैसे कई पेड़ लगाए और देख-रेख की व्यवस्था की.

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बाद में एक ट्रस्ट बनाया गया और जन-सहयोग से एक करोड़ रुपये एकत्र कर इस मुक्तिधाम का विकास किया गया.

नगर विकास न्यास की और से 45 लाख और सांसद कोष से भी 25 लाख रुपये की मदद मिली.

अब यहाँ पर आठ बरामदे, एक प्रतीक्षालय और स्वच्छ स्नानघर और सुविधाएँ हैं. एक वाचनालय भी है, जहाँ पांच हज़ार पुस्तकें हैं और जिम है, जहाँ योग कक्षाएं चलती हैं.

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लकड़ी से दाह संस्कार की व्यवस्था के अलावा यहाँ एक साल पहले 70 लाख रुपए के व्यय से एलपीजी चालित शवदाह गृह भी शुरू हो गया है, जिसमें फिलहाल कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा.

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जाजू का दावा है कि यह देश का सबसे अच्छा मुक्तिधाम है.

इसके रख-रखाव पर सालाना लगभग 10 लाख का खर्च आता है, जिसे जन सहयोग से उठाया जाता है.

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यूँ तो इस शहर की पहचान टेक्सटाइल मिलों की वजह से है, पर इस मुक्तिधाम के साथ आम जन के सहयोग का मजबूत ताना-बाना जुड़ा हुआ है.

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