गूजरों को मिलेगा आरक्षण

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Image caption गूजरों ने दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग जाम कर रखा है.

राजस्थान सरकार गूजरों को पांच फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए तैयार हो गई है.

आठ दिन के गतिरोध के बाद गूजर नेताओं और सरकार के बीच सहमति बन गई.

गुरूवार को राज्य सरकार और कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अगुवाई में गूजर नेताओं के बीच तीन घंटे से ज़्यादा लंबी चली बातचीत में इस समझौते पर दस्तख़त कर दिए गए.

इसके लिए सरकार एक विशेष विधेयक लाएगी.

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि वो आंदोलनकारियों को रेल मार्ग और सड़कों से हटने के लिए कहेंगे.

सरकार की योजना है कि गूजर आरक्षण को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल कर लिया जाए ताकि इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती ना दी जा सके.

फ़टकार

Image caption गूजर सरकारी नौकरियों में पाँच फ़ीसदी आरक्षण मांग रहे हैं.

इससे पहले हाई कोर्ट ने इस मामले पर राज्य सरकार को कड़ी फ़टकार लगाई थी.

दरअसल अदालत के निर्देशक के बावजूद राजस्थान सरकार गूजरों को रेल पटरी और राजमार्गों से नहीं हटा सकी.

गुरुवार को सरकार के वरिष्ठ अधिकारी हाई कोर्ट में पेश हुए.

हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक और रेलवे अधिकारियों को कड़ी फ़टकार लगाई और पूछा कि अब तक रास्ता रोके लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

गूजरों की ओर से भी उनके वकील अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपनी बात कहनी चाही लेकिन अदालत ने इसकी अनुमति नहीं दी.

आंदोलन

सरकारी नौकरियों में पांच फ़ीसदी आरक्षण की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से भी ज़्यादा समय से गूजर आंदोलन कर रहे थे.

वो रेल यातायात और सड़कों को जाम करके बैठे थे.

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Image caption आज फिर सरकार और गूजरों के बीच वार्ता होगी.

राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार शाम तक गूजर आंदोलनकारियों को रेल पटरियों और सड़क मार्गों से हटाने का आदेश दिया था लेकिन राजस्थान सरकार इसे प्रभाव में लाने में नाकाम रही है.

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