हरिद्वार में गंगा में खुदाई पर रोक

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उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी पर अब खनन का काम नहीं हो सकेगा.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार ज़िले में गंगा से हर तरह के ख़नन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश दिए हैं.

ये पहला मौका है जब सरकार ने इस तरह का आदेश दिया है.

गंगा में अवैध और वैध, हर किस्म के ख़नन को लेकर हरिद्वार का एक प्रमुख संगठन, मातृ सदन लंबे समय से आंदोलन कर रहा है.

मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद सरस्वती इस मसले पर पिछले करीब 10 दिन से अनशन पर बैठे हुए थे.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “हमने पोकलैंड मशीनों का प्रयोग बंद कर दिया है. हम एक बार फिर से देखेंगे कि इस काम में कहीं कोई गलती तो नहीं हो रही है. अगर ड्रेजिंग गलत हो रही है तो नहीं करेंगे. किसी को जान देने की ज़रूरत क्यों पड़े. अगर बाढ़ से कुछ गांवों को बचाने के लिए ड्रेजिंग जैसे कुछ कदम उठाने पड़े तो उसमें भी किसी को एतराज़ नहीं होना चाहिए.”

आंदोलन

कमिश्नर और आईजी पुलिस (गढ़वाल) को गंगा की निगरानी का आदेश भी दिया गया है. मुख्यमंत्री ने ये भी कहा है कि किसी भी तरह का ख़नन होता है तो उसके लिए हरिद्वार के ज़िलाधीश जवाबदेह होंगे.

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Image caption स्वामी शिवानंद सरस्वती पिछले दस दिनों से अनशन पर बैठे हुए हैं.

मातृ सदन के प्रमुख स्वामी शिवानंद ने बीबीसी को बताया, “सरकारी आदेश से संतोष नहीं है. जब तक खनन पर रोक का नोटिफ़िकेशन नहीं आ जाता तो हमें संतोष नहीं होगा. ”

शिवानंद के मुताबिक ख़नन कार्य ने हरिद्वार में गंगा को बहुत बड़े ख़तरे में डाल दिया है.

उनका दावा है, “खनन से बाढ़ की सुरक्षा का तर्क ग़लत है क्योंकि इससे बाढ़ ही आती है. लाभ नहीं होता है. तटबंध बर्बाद हो जाते हैं. खनन से गंगा की तबाही ही हुई है. ”

शिवानंद के युवा शिष्य स्वामी निगमानंद की चार साल पहले जून महीने में ही 68 दिन के अनशन के बाद अस्पताल में मौत हो गई थीं.

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