विफलता को छात्र एक अवसर मानें: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बोर्ड परीक्षा में नाकाम रहे छात्रों को निराश नहीं होना चाहिए और विफलताओं से सीखना चाहिए.

मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा, "जो विफलता को एक अवसर मानता है, वो सफलता का शिलान्यास भी करता है. जो विफल हुए हैं, उनसे मैं यही कहूँगा कि ज़िन्दगी में सफलता-विफलता स्वाभाविक है. इतने सारे क्षेत्र हैं, इतनी विविधताओं से भरा हुआ विश्व है. हम ज़रूर प्रयास करें, साहस करें."

उन्होंने कहा, "खेलकूद कितना बड़ा क्षेत्र है. खिलाडियों बनने के अलावा भी खेल कूद जगत के लिए कितने उत्तम मानव संसाधन की आवश्यकता होती है. देश को उत्तम शिक्षकों, सैनिकों और वैज्ञानिकों की ज़रूरत है तो उत्तम कलाकार और संगीतकारों की भी आवश्यकता है."

प्रधानमंत्री ने कहा, "लेकिन कभी ये भी सोचना चाहिये, कि मैं जो कुछ भी बनूँगा, जो कुछ भी सीखूंगा, मेरे देश के लिए वो काम आए, ऐसा क्या होगा. प्रचलित मार्गों पर ही जाकर अपने को खींचते क्यों हो?"

आठवीं बार मन की बात

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"आप ज़रा साहस के साथ आपकी रूचि, प्रकृति, प्रवृत्ति के हिसाब से रास्ता चुनिए अब जगत बहुत बड़ा हो चुका है. विषयों की भी सीमायें नहीं हैं, अवसरों की भी सीमायें नहीं हैं."

मोदी ने आठवीं बार लोगों से मन की बात की है. इसकी शुरुआत तीन अक्तूबर 2014 को हुई थी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे में मोदी ने उनके साथ संयुक्त तौर पर रेडियो पर 'मन की बात' कार्यक्रम किया था.

पिछले महीने इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नेे नेपाल में आए भूकंप और यमन से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए चलाए गए अभियान पर बात की थी.

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