'दाढ़ी रखने के कारण नौकरी से निकाला'

मोहम्मद अली इस्माइल, कोलकाता, पश्चिम बंगाल इमेज कॉपीरइट PM Tewari
Image caption मोहम्मद अली इस्माइल एक कंपनी में जनरल मैनेजर (माइंस) के पद पर थे.

पश्चिम बंगाल में एक मुसलमान युवक ने आरोप लगाया है कि दाढ़ी रखने के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.

वहीं कंपनी युवक को 'फ्रॉड' बता रही है. यह मामला गुरुवार को राज्य विधानसभा में भी गूँजा.

दक्षिण कोलकाता के रहने वाले मोहम्मद अली इस्माइल छह साल से आधुनिक ग्रुप आफ इंडस्ट्रीज में जनरल मैनेजर (माइंस) के पद पर काम कर रहे थे.

वो पिछले साल मई में हज करने मक्का-मदीना गए थे.

इस्माइल कहते हैं, "मैं हज से लौटने के बाद से ही दाढ़ी रखने लगा था. उसी वक़्त से मेरी सैलरी आधी कर दी गई थी. इस साल मार्च में बिना कोई कारण बताए मुझे नौकरी से निकाल दिया गया."

लेकिन कंपनी इस्माइल के आरोपों को ग़लत बताती है.

कंपनी के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल के भाई महेश अग्रवाल कहते हैं, "इस्माइल के तमाम आरोप झूठे हैं. उसने दफ़्तर में तोड़-फोड़ करने की धमकी दी थी. वो एक फ्रॉड हैं."

थाने में एफ़आईआर

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Image caption लेफ्ट फ्रंट के नेताओं ने मामले को विधान सभा में उठाया.

इस्माइल के अनुसार जब उन्होंने अपनी बक़ाया सैलरी के सिलसिले में कंपनी के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल से मुलाक़ात की तो उन्होंने उन्हें 'आतंकवादी' कहते हुए दफ़्तर से बाहर निकलवा दिया.

इस्माइल का कहना है कि कंपनी के प्रबंध निदेशक के इस बर्ताव के बाद उन्होंने कोलकाता के बालीगंज थाने में एक एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.

गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा में भी इस मामले की गूँज सुनाई दी.

वाम मोर्चा के विधायकों ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए 'कार्रवाई न करने वाले' पुलिसवालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की.

विधानसभा में विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्र ने बीबीसी से कहा, "दोषी पुलिस वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए."

भुगतान की पेशकश

इस्माइल के अनुसार विधानसभा में मामला उठने के बाद कंपनी ने उनको एसएमएस भेजकर उनकी बकाया राशि के भुगतान की पेशकश की है.

इस्माइल कहते हैं, "मैंने ऐसा करने से मना कर दिया. मैं अब अपना बकाया नहीं, बल्कि न्याय चाहता हूं."

वो कंपनी से सार्वजनिक माफ़ीनामे और न्याय के लिए कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने पर विचार कर रहे हैं.

बालीगंज थाने के अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है.

इस्माइल ने इस मामले में अल्पसंख्यक आयोग, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी गुहार लगाई है.

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