'यौन उत्पीड़न मामलों में टू फ़िंगर टेस्ट नहीं'

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दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में विवादित 'टू-फ़िंगर टेस्ट' का इस्तेमाल नहीं होगा और सरकार पहले जारी किए गए सर्कुलर को और स्पष्ट करेगी.

स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में 'टू फिंगर टेस्ट' करने संबंधी दिशा निर्देश दिए थे. सर्कुलर में कहा गया है कि टेस्ट पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण 'अन्याय' हो सकता है.

सर्कुलर में कहा गया कि ये धारणा ग़लत है कि इस टेस्ट ये जाना जाता है कि महिला 'सेक्स की अभयस्त' है या नहीं.

सर्कुलर के मुताबिक यह टेस्ट अंगों को लगी चोट के आंकलन, संक्रमण की जाँच और उसके इलाज और सेंपल इकट्ठा करने के लिए किया जाता है.

'नहीं वापस होगा सर्कुलर'

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के सर्कुलर पर सवाल उठने के बाद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को एक प्रैस वार्ता में कहा कि सरकार के सर्कुलर को 'गलत समझा गया है और इसका इस्तेमाल यौन उत्पीड़न के मामलों में नहीं किया जाएगा.'

Image caption दिल्ली में 2012 में हुए गैंगरेप के बाद आई जस्टिस वर्मा की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि 'टू फ़िंगर टेस्ट' नहीं किया जाना चाहिए.

इसमें कहा गया, "यदि यह टेस्ट नहीं किया जाता है तो पीड़ित का पूरा आंकलन नहीं हो पाएगा और इससे अन्याय हो सकता है"

उन्होंने कहा कि सर्कुलर को वापस नहीं लिया जाएगा और दिल्ली सरकार इस पर सफ़ाई भी पेश करेगी.

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में 'टू फ़िंगर टेस्ट' पर प्रतिबंधित लगा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह टेस्ट महिलाओं के निजता के अधिकार का उल्लंघन है और इसकी कोई वैज्ञानिक वैधता नहीं है.

बलात्कार के मामलों में बचाव पक्ष के वकील अक़्सर इस टेस्ट का हवाला देकर दलील देते हैं कि पीड़ित पहले से ही सेक्स की अभ्यस्त है.

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