क्या कर्नाटक एक 'लुटेरा' राज्य है?

स्वागत, कर्नाटक

अगर कोई सोशल मीडिया के आधार पर राय बनाता हो तो उसे यकीन हो जाएगा कि अपनी मोटर वाहन टैक्स नीति की वजह से कर्नाटक एक 'लुटेरा' राज्य है.

फ़ेसबुक और चेंज डॉट ओआरजी पर तीन अलग-अलग ऑनलाइन अभियान चल रहे हैं जिनका समर्थन करीब एक लाख लोग कर रहे हैं.

साल 2014 में कर्नाटक के मोटर वाहन टैक्स क़ानून में बदलाव किया गया. नए क़ानून के अनुसार किसी अन्य राज्य में रजिस्टर्ड गाड़ी अगर कर्नाटक में 30 दिन से ज़्यादा रहती है तो उसे लाइफ़ टाइम टैक्स देना होगा.

ये ऑनलाइन अभियान इसी क़ानून के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा है.

'30 दिन का नियम'

कर्नाटक टैक्स के रूप में गाड़ी की पूरी कीमत का कुछ प्रतिशत लेता है. पांच लाख तक की कीमत के वाहन पर 14.5 फ़ीसदी की दर से टैक्स लिया जाता है. इससे अधिक क़ीमत की गाड़ियों पर हर पाँच लाख पर एक प्रतिशत टैक्स बढ़ जाता है.

पिछले हफ़्ते परिवहन विभाग के अधिकारियों ने लाइफ़ टाइम टैक्स न देने वाले 150 वाहनों को ज़ब्त कर लिया था.

फ़ेसबुक पर कैंपेन शुरू करने वाले वसीम मेमन कहते हैं, "कर्नाटक से बाहर के गाड़ी मालिकों को आतंकित किया जा रहा है. इसलिए हमने यह कैंपेन 'ड्राइव विदाउट बॉर्डर्स' शुरू किया."

कर्नाटक के परिवहन आयुक्त डॉक्टर रामेगौड़ा ने बीबीसी से कहा, "हमें लुटेरा राज्य कैसे कहा जा सकता है? यह किसी तरह का कोई शोषण नहीं है. जब वो राज्य से बाहर जाते हैं तो टैक्स की राशि वापस कर दी जाती है. हम लोगों ने 30 दिन के नियम की शुरुआत नहीं की है."

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कर्नाटक से तीन साल पहले तमिलनाडु ने 30 दिन के नियम की शुरुआत की थी. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल में भी ऐसा ही नियम है. इन राज्यों के अलावा गोवा में भी यही नियम है.

यह संशोधन इसलिए किया गया था क्योंकि दक्षिण भारतीय राज्यों को महंगी कारों पर आय का नुक़सान हो रहा था. लोग ऐसी कारों को केंद्र शासित प्रदेश पुडुच्चेरी में रजिस्टर करवा लेते थे क्योंकि वहां टैक्स की दर पूरे दक्षिण भारत में सबसे कम है.

'ख़ज़ाना-2'

इस क़ानून को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने पहले तो इस पर स्टे ऑर्डर दिया लेकिन बाद में राज्य सरकार की एक अपील को स्वीकार करते हुए स्टे ऑर्डर को बदल दिया.

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परिवहन विशेषज्ञ बीएन श्रीहरि कहते हैं, "पूरे देश में टैक्स ढांचा एक समान होना चाहिए. इसे राज्य एकत्रित करते हैं या केंद्र और इसका बंटवारा कैसे होता है, यह एक अलग विषय है."

श्रीहरि कहते हैं, "इसमें कोई संदेह नहीं कि सड़कों का इस्तेमाल करने वालों में इसे लेकर बहुत भ्रम रहता है. हालांकि केंद्र सरकार के पास एकसमान टैक्स का एक प्रस्ताव है जो अभी पारित नहीं हुआ है."

देश में एकसमान टैक्स का प्रस्ताव सबसे पहले 2013 में परिवहन विकास परिषद की 35वीं बैठक में रखा गया था. अक्टूबर 2014 में हुई पिछली बैठक में मोटर वाहन कर एकत्र करने के राज्यों के अधिकार केंद्र को दिए जाने पर तमिलनाडु ने ऐतराज किया था.

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केंद्र और राज्यों के बीच जारी रस्साकशी के दौरान कर्नाटक मोटर वाहन टैक्स संग्रह के लिए ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट 'खज़ाने-2' की बीटा टेस्टिंग कर रहा है.

यह इसलिए क्योंकि नियम के मुताबिक वाहन मालिक अपने राज्य में लौटकर कर्नाटक में जमा किया गया अतिरिक्त कर वापस पा सकते हैं, लेकिन लगातार इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं कि राज्यों में लौटकर सरकारी मशीनरी से ये टैक्स वापस पाना बेहद मुश्किल है.

डॉक्टर रामेगौड़ा कहते हैं, "एक बार हम यह ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट शुरू कर दें तो हम वाहन मालिक को उसका लाइफ़ टाइम टैक्स लौटा पाएंगे. इससे कर देने वाले वाहन मालिकों को शहर छोड़ने पर उनका पैसा वापस मिलने में मदद मिलेगी."

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