साइंस पढ़ाने पर ही मदरसों को मिलेगा पैसा

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महाराष्ट्र सरकार उन्हीं मदरसों को आर्थिक सहायता देगी जिनमें अंग्रेजी, साइंस, गणित और सोशल साइंस की भी शिक्षा दी जाएगी. ये फ़ैसला राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने लिया है.

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एकनाथ खडसे ने गुरुवार को मुंबई में कहा, "मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए ज़रूरी है कि वहां आधुनिक विषय पढ़ाए जाएं ताकि वहां पढ़ने वाले उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें."

इन विषयों को शिक्षा नहीं देने वाले मदरसों को सरकारी आर्थिक मदद नहीं मिलेगी.

महाराष्ट्र में कुल 1,889 मदरसे हैं, जिनमें 1.48 लाख बच्चे पढ़ते हैं.

महाराष्ट्र में डॉ ज़ाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों को आर्थिक मदद दी जाती है.

विरोध

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सरकार के इस फ़ैसले का विरोध भी शुरू हो गया है.

मुंबई में मदरसा चलाने वाले मौलाना महमूद दरयाबादी का कहना है कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा दी जाती है जिसमें हस्तक्षेप करने का सरकार को बिलकुल अधिकार नहीं है.

बीबीसी हिन्दी से बातचीत में दरयाबादी ने कहा, "हम मदरसों को किसी भी प्रकार की सरकारी आर्थिक मदद के सख़्त ख़िलाफ़ हैं. सरकार हम पर अपने निर्णय थोप रही है. हमारी जायज़ मांगों को नजरंदाज़ कर सरकार हमें वह सब दे रही है, जो हम नहीं चाहते."

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि आधुनिक शिक्षा में मुस्लिम छात्रों को आरक्षण मिले. हमें नए स्कूल, कॉलेज खोलने की अनुमती दी जाए. मदरसों में आधुनिक शिक्षा देने के बजाय अगर सरकार नए स्कूल, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की अनुमति दे तो ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा."

200 मदरसों को मदद

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साल 2013–14 में महाराष्ट्र सरकार ने डॉ ज़ाकिर हुसैन मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत राज्य के मदरसों को सालाना 2.5 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया था.

इसके लिए 430 आवेदन आए थे, जिनमें से 200 को सरकार ने आर्थिक सहायता मुहैया कराई थी.

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