एनडी ने बेटे को मुलायम की सरपरस्ती में दिया

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बीते वक्त के दिग्गज कांग्रेसी नेता, दो राज्यों के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी ने कांग्रेस से बहुत पुराना नाता ख़त्म करके अपने बेटे को समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की सरपरस्ती में दे दिया है.

वे खुद सपा के पोस्टरों और मंचों पर नजर आने लगे हैं. हो सकता है अगले विधानसभा चुनाव में सपा के लिए वोट भी मांगते नजर आएं.

उनके बेटे रोहित शेखर को सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के कहने पर परिवहन विभाग का सलाहकार बनाया गया है.

प्रमुख सचिव (परिवहन) कुमार अरविंद देव ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं.

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रोहित शेखर ने तिवारी को अपना जैविक पिता साबित किया जबकि वे उसे झुठलाने पर अड़े हुए थे.

रोहित की राजनीतिक पारी

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जैसा कि रोहित चाहते थे, अब उन्होंने अखिलेश यादव की सरकार में पद लेकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भी कर दी है.

अदालत का फैसला आने के बाद एनडी को उनकी माँ उज्जवला शर्मा से शादी करनी पड़ी जो अब उनके साथ लखनऊ में रहती हैं.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी है कि जिस आदमी को पार्टी में कोई जानता तक नहीं, उसे पद दिया गया जबकि पुराने वफ़ादार कार्यकर्ता मारे मारे फिर रहे हैं.

उधर कांग्रेस में एनडी के रुख को लेकर बेफ़िक्री है. उनकी बदनामी के बाद कांग्रेस के नेताओं ने अरसे से उनसे मिलना जुलना बंद कर दिया था.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह के एनडी से उस जमाने से रिश्ते हैं, जब वह नेता प्रतिपक्ष और एनडी यूपी के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.

आंध्रप्रदेश के राजभवन स्कैंडल के बाद एनडी देहरादून के एक गेस्ट हाउस में रहने लगे थे, जहाँ मुलायम सिंह उनसे मिलने जाते थे. यूपी में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद एनडी एक हफ्ते के लिए लखनऊ आए. मुलायम सिंह ने उन्हें यहीं रोक लिया.

अब एनडी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ यदा कदा मंच पर, त्यौहारों के मौके पर पत्नी के साथ मुलायम सिंह के घर पर नजर आते हैं.

उनके पास अपनी समस्याएं बताने लोग पहुंचते हैं तो वे मुख्यमंत्री कार्यालय को सिफारिशी चिट्ठियां लिखते हैं और अफसरों को फोन करते हैं.

'पुराना रिश्ता निभा रहे हैं'

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कुछ मौकों पर उन्हें मंचों पर देशभक्ति के गाने गाते और भावुक होकर रोते भी देखा गया है.

उनकी पत्नी उज्जवला शर्मा ने कई मौकों पर मुलायम सिंह यादव से अपने बेटे को अपनी छत्रछाया में लेने की अपील की थी.

रोहित विधान परिषद में जाना चाहते थे, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सलाहकार बनाकर सरकार से जोड़ना ज़्यादा ठीक समझा.

कांग्रेसियों का कहना है कि मुलायम सिंह ने उन्हें ब्राह्मण वोटरों को आकर्षित करने के लिए साथ लिया है जबकि सपा के नेता कहते हैं, मुलायम सिंह पुराना रिश्ता निभा रहे हैं वरना उनकी कोई राजनीतिक उपयोगिता बची नहीं है.

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