पूर्व सैनिक जाएँगे भूख हड़ताल पर, लौटाएंगे मेडल

भूतपूर्व सैनिक, वन रैंक वन पेंशन को लेकर रैली करते हुए

दिल्ली की सड़कों पर भारतीय सेना के पूर्व अधिकारियों और जवानों ने एक अलग सा मोर्चा खोल दिया है.

यह मोर्चा उन्होंने 'वन रैंक वन पेंशन' की अपनी लंबित मांग को लेकर खोला है.

देश के विभिन्न हिस्सों से जमा हुए पूर्व सैनिकों ने 'वन रैंक वन पेंशन' की अपनी मांग को लेकर पहले भी अपने मेडल भारत के राष्ट्रपति को लौटाए थे.

पूर्व सैनिक एक बार फिर राष्ट्रपति भवन जाकर अपने मेडल लौटाने का अभियान चला रहे हैं.

क्या परेशानी है?

ब्रिगेडियर के पद से सेवानिवृत हुए जगदीश कुमार नंदपाल ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि 'वन रैंक वन पेंशन' के लागू नहीं होने से पूर्व सैनिकों को क्या परेशानियां हो रही हैं.

Image caption पूर्व ब्रिगेडियर जगदीश कुमार नंदपाल

वो कहते हैं, "मैं 2003 में रिटायर हुआ हूँ. मेरी मूल पेंशन क़रीब 29 हज़ार रुपए है. लेकिन जो अब सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनकी पेंशन क़रीब 42 हज़ार रुपए है. एक ही पद से रिटायर हुए लोगों के बीच कितना फ़र्क़ है."

पूर्व सैनिकों के 'वन रैंक वन पेंशन' का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के लोक सभा चुनावों के घोषणापत्र में भी प्रमुखता के साथ रखा गया था.

मोदी का वादा

मोदी ने रिवाड़ी में आयोजित एक जनसभा में पूर्व सैनिकों से वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो 'वन रैंक वन पेंशन' योजना को फ़ौरन लागू किया जाएगा.

वायुसेना से रिटायर हुए महेश गुज्जर भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जमा पूर्व सैनिकों में रिटायरमेंट के पंद्रह सालों के बाद भी 'वन रैंक वन पेंशन' का इंतज़ार कर रहे हैं.

गुज्जर का कहना था कि उन्होंने बीस साल नौकरी की और उन्हें रिटायर हुए भी 15 साल हो गए हैं. मगर जो पेंशन उन्हें मिल रही है वो उन्हीं के पद से अब सेवानिवृत्त हुए सैनिकों से काफ़ी कम है.

हरियाणा से आए सेना के पूर्व कप्तान सुखबीर अहलावत का कहना है कि अब तक पूर्व सैनिक क़रीब तीस हज़ार मेडल राष्ट्रपति भवन में जमा कर चुके हैं.

रिटायर होने की उम्र

अहलावत का कहना है कि अगर सैनिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र भी सरकारी कर्मचारियों की तरह 60 या 62 कर दी जाए तो वे 'वन रैंक वन पेंशन' की मांग नहीं करेंगे.

Image caption पूर्व एडमिरल एचसी मल्होत्रा

रैली में शामिल नौसेना के पूर्व एडमिरल एचसी मल्होत्रा को अफ़सोस है कि संसद और विधानसभा में बैठकर नेता अपना वेतन भत्ता तो बढ़ा लेते हैं मगर सैनिकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.

देश में 25 लाख से ज़्यादा पूर्व सैनिक हैं जो लंबे समय से वन रैंक-वन पेंशन की मांग कर रहे हैं क्योंकि वे दूसरे सरकारी कर्मचारियों की तुलना में जल्दी रिटायर हो जाते हैं.

भूख हड़ताल

यदि कोई नौकरशाह 33 या ज़्यादा नौकरी करता है तो उसकी पेंशन 33 साल तक की नौकरी के बाद तनख्वाह का 50 प्रतिशत होती है.

वहीं कई सैनिक आमतौर पर अपनी सेवा के 10 से 12 साल के अंदर ही रिटायर हो जाते हैं. उन्हें आख़िरी तनख्वाह के 50 प्रतिशत से कुछ कम ही पेंशन मिल पाती है.

पूर्व सैनिकों ने इस बार अपने संघर्ष को और तेज़ बनाने का मन बना लिया है.

सोमवार से ये पूर्व सैनिक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे और अपनी मांगों को लेकर रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और राष्ट्रपति से भी मिलेंगे.

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