ये कैसे बांग्लादेशी शरणार्थी?

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असम पुलिस के मुताबिक़, बीते सोमवार को हैलाकांदी ज़िले के लखीरबंद गांव के पास से एक पालतू हाथी और उसके बच्चे को बरामद किया गया है.

ये दोनों हाथी बांग्लादेश के मोहम्मद मखलीसुर रहमान के बताए जा रहे हैं, लेकिन इनकी वापसी में अंतरराष्ट्रीय क़ानून का पेंच फंस गया है.

लगता है, अब इनकी वापसी दोनों देशों के राजनयिक हस्तेक्षप पर निर्भर हो गई है.

रहमान ने बांग्लादेश के मौलवी बाज़ार ज़िले के कुलाउरा थाने में हाथियों की गुमशुदगी के बारे में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.

अपनी शिकायत में रहमान ने यह उल्लेख किया है कि उसके कुलाउरा स्थित घर के पास वाले जंगल से 22 जनवरी को दोनों हाथी लापता हुए थे.

सत्यापन

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हैलाकांदी के पुलिस अधीक्षक राजेन सिंह ने बताया कि पुलिस ने हाथियों की तस्करी के संदेह में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, लेकिन अभी इस मामले की जांच चल रही है.

पुलिस हैलाकांदी शहर से इन दो हाथियों को पकड़ कर ले आई है और इन्हें पुलिस लाइन के सामने मैदान में रखा गया है.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ख़ुद को हाथी का मालिक बताने वाले रहमान भी उचित दस्तावेज़ों के साथ बांग्लादेश से यहां पहुंच गए हैं.

एक वन अधिकारी मुताबिक़, बांग्लादेश के उलट, भारत में पालतू हाथियों को माइक्रोचिप्स लगाए जाते हैं.

ऐसे में जानवरों की 'राष्ट्रीयता' सत्यापित करने का काम मुश्किल नहीं होगा.

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