भारत, गुवाम से भी कैसे हार गया!

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फ़ीफ़ा के 2018 विश्व कप क्वालिफ़ॉयर मैच में भारत मंगलवार को एक ऐसे देश से हार गया जो फ़ीफ़ा रैंकिंग में उससे 33 पायदान नीचे है.

भारत को 2-1 से हराने वाले गुवाम की आबादी दो लाख से भी कम है. इससे पहले भारत को ओमान ने भी 2-1 से हराया था.

गुवाम की फ़ीफ़ा रैंकिंग 174 है जबकि भारतीय फुटबॉल 141वें स्थान पर है.

दो बार एशियाई चैंपियन रहे भारत के इस दयनीय प्रदर्शन पर फ़ुटबॉल समीक्षक नोवी कपाड़िया का कहना है कि विश्व कप क्वालिफॉयर में भारत का इतना निराशाजनक प्रदर्शन पहले कभी नहीं रहा.

विश्व कप क्वालिफॉयर में भारत ने आज तक 40 में से केवल 9 मैच जीते हैं.

कहां पहुंच गया स्तर?

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साल 2001 में सुखविंदर सिंह की कोचिंग में भारत का ब्रुनेई से मैच था. उसकी रैंकिंग भी भारत से लगभग 30 स्थान नीचे थी, भारत ने उसे 5-0 से हराया था.

उससे पहले साल 1996 में फिलिपींस को हराया था. अब एक ऐसी टीम जिसकी इतनी कम रैंकिंग थी और जिसकी आबादी 2 लाख भी कम है उससे भारत हार गया.

कपाड़िया कहते हैं कि भारत की टीम में दो-दो विदेशी कोच हैं, विदेशी ट्रेनर है, फ़ाइव स्टार होटल में खिलाड़ी ठहरते हैं. एक से बढ़कर एक सुविधा है और पैसे अच्छे मिलते हैं. इंडियन सुपर लीग से लेकर आईलीग जैसे बड़े टूर्नामेंट खिलाड़ी खेलते हैं.

उनके मुताबिक़, टीम के कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन ने देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को उनके हालिया खेल के आधार पर मौक़ा दिया उसके बाद भी ऐसा परिणाम दुख की बात है.

नोवी कहते हैं कि हैरानी की बात है कि क्या भारत का फुटबॉल स्तर इतना गिर गया है कि भारत को दुनिया कि सबसे निचली रैंकिंग वाली 20-30 टीमों के ख़िलाफ जीतना भी मुश्किल हो रहा है.

दक्षिण एशिया में भी हालात ख़राब

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कभी भारत दक्षिण एशियाई फ़ुटबॉल में राजा होता था. अब उसके लिए अफ़ग़ानिस्तान और मालदीव जैसी टीमों से जीतना मुश्किल हो रहा है.

नोवी कपाड़िया कहते हैं कि अगर इस ग्रुप में भारत तीसरे स्थान पर भी आता तो भारत साल 2019 के एशिया कप में जगह बना लेता. इस बार एशिया कप में 16 की जगह 24 टीमें हिस्सा लेंगी.

और हां इस हार के दुख में वह खुशी भी दब गई जो भारत के कप्तान सुनील छेत्री को अपना 50वां अंतराष्ट्रीय गोल करके हासिल हुई थी.

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