रचनाशील आर्किटेक्ट चार्ल्स कोरिया नहीं रहे

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भारत और विदेश में मशहूर इमारतों का डिज़ाइन तैयार करने वाले 84 साल के जाने-माने आर्किटेक्ट चार्ल्स कोरिया का निधन मुंबई में मंगलवार देर रात हो गया.

कोरिया ने भारत में कई महत्वपूर्ण इमारतों को डिज़ाइन किया है जो आज़ादी के बाद की वास्तुकला को परिभाषित करती हुई नज़र आती हैं.

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Image caption पुणे में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स की इमारत

ऐसी इमारतों में अहमदाबाद में साबरमती का गांधी मेमोरियल, भोपाल का भारत भवन और विधान सभा भवन, गोवा में कला अकादमी और जयपुर का जवाहर कला केंद्र, दिल्ली का ब्रिटिश काउंसिल भी शामिल है.

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Image caption मुंबई का कंचनजंघा अपार्टमेंट

उन्होंने दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और बैंगलूरु की टाउनशिप का डिज़ाइन भी किया.

नवी मुंबई के वास्तुकार

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Image caption दिल्ली में ब्रिटिश काउंसिल इमारत

इसके अलावा उन्होंने हाल तक विदेश में भी महत्वपूर्ण इमारतों की डिज़ाइन तैयार की जिनमें टोरंटो में इस्माइली सेंटर और बोस्टन के एमआईटी में ब्रेन साइंस सेंटर भी शामिल है.

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Image caption अहमदाबाद का 'दि ट्यूब हाउस'

उन्हें नवी मुंबई का मुख्य आर्किटेक्ट भी कहा जाता है. उन्होंने अपनी डिज़ाइन में 'ओपन टू स्काई' पैटर्न को तरजीह दी और उन्हें अपनी इमारतों में स्थानीय तकनीक का इस्तेमाल करना पसंद था.

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Image caption पुुणे का इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स

जिस तरीक़े से शहरों की योजनाएं बन रही हैं उसकी आलोचना कोरिया अक्सर करते थे. उन्होंने एक पुरस्कार समारोह में कहा था, "बाज़ार की शक्तियां शहर नहीं बनाती बल्कि उन्हें बर्बाद करती हैं."

उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके है.

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