राजस्थानः बिना पहचान पत्र के तेज़ाब को ना

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सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद राज्यों ने तेज़ाब फेंकने की घटनाओं पर रोक के उपाय शुरू कर दिए हैं.

राजस्थान ने बिना पहचान पत्र के तेज़ाब खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके लिए दुकानदारों को हिदायत दी जा रही है.

सरकार ने राजस्थान में विष अधिपत्य एवं विक्रय नियम, 2015 लागू करने का ऐलान किया है.

नियमों का उल्लंघन करने पर पचास हजार रूपये के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है.

यह फैसला मंगलवार की शाम जयपुर में कैबिनेट की एक बैठक में किया गया.

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अब कोई भी दुकानदार ग्राहक का पहचान पत्र बिना देखे तेज़ाब नहीं बेचेगा.

दो-तीन लाख की सहायता

महिला संगठन और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता लगातार तेज़ाब हमले रोकने के लिए आवाज बुलन्द कर रहे थे.

राज्य के संसदीय मंत्री राजेन्द्र राठौर ने नई व्यवस्था के बारे में मीडिया को बताया कि हर इलाके में उपखंड अधिकारी को इन नियमों को लागू करने को कहा गया है.

सरकार के अनुसार अब तेज़ाब पीड़ित को दो से तीन लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.

'तेज़ाब बिक्री पर पाबंदी ज़रूरी है'

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने इस साल शुरू में ही राज्यों के साथ बैठक की और अदालती आदेशों के किर्यान्वन पर बातचीत की.

इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में गठित सामाजिक न्याय बेंच ने निर्देश दिए थे.

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अदालत ने सभी राज्यों से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था. इसके बाद राज्यों में सतर्कता बढ़ी है.

तेज़ाब पीड़िता लक्ष्मी की पहल

तेज़ाब पीड़िता लक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

एक पुरूष ने जिंदगी बर्बाद की, एक संवार रहा है

साल 2005 की बात है. लक्ष्मी उस वक्त महज 16 -17 साल की थी. उस दिन वह दिल्ली के खान मार्किट में जा रही थी.

सहसा उस पर तेज़ाब फैंक दिया गया. उसका चेहरा पूरी तरह खराब हो गया.

परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा. इसी दौरान उसके पिता का निधन हो गया. भाई किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया.

इन हालातों में भी वो खड़ी हुई और अदालत में याचिका दाखिल की.

मुफ्त इलाज

देश का सर्वोच्च अदालत तब से अब तक कई बार तेज़ाब की बिक्री और उसके रोकने की व्यस्था पर नाराजगी जता चुका है.

तेज़ाब के ज़ख़्मों पर लगा प्यार का मरहम

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2014 में सुनवाई के दौरान अफ़सोस जाहिर किया कि ऐसी घटनाएं अब भी हो रही है.

अदालत के फरमान पर पूरे देश में इस साल मार्च तक ऐसे हमले रोकने और पीड़िता को मदद के पुख्ता उपाय करने थे.

अदालत ने हाल में तेज़ाब पीड़िता के लिए हर अस्पताल में मुफ्त इलाज के लिए निर्देश दिए थे. इसमें निजी अस्पताल भी शामिल हैं.

यूपी में सबसे ज्यादा मामले

पिछले साल देश में ऐसी कोई 310 घटनाएं सामने आईं जिसमें किसी महिला पर तेज़ाब फेंका गया.

अप्रैल 2015 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार इनमें सबसे ज्यादा घटनाएं 186 यूपी में हुई.

तेज़ाब फेंकने वालों के लिए मौत की सज़ा?

केंद्र शासित राज्यों की बात करें तो तेज़ाब हमले की दिल्ली में सबसे ज्यादा 27 घटनाएं दर्ज की गईं.

आंकड़ों के अनुसार देश में पिछले साल 208 लोगों को तेज़ाब फेंकने की घटनाओं में गिरफ्तार किया गया.

फिलहाल ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं.

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