'देवबंद ने योग का समर्थन किया'

भारत के आयुष मंत्री श्रीपद नायक का कहना है कि योग किसी भी धर्म से परे है और सभी के लिए है.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली में विशाल आयोजन के बाद बीबीसी को दिए साक्षात्कार में श्रीपद नायक ने कहा कि भारत हमेशा से अपनी अच्छी चीज़ें दुनिया को देता रहा है और योग के ज़रिए अब पूरी दुनिया स्वस्थ होगी.

'योगी हैं मोदी'

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योग दिवस की ज़रूरत क्यों पड़ी इस सवाल पर श्रीपद नायक कहते हैं, "भारतीय संत हमेशा से योग का प्रचार-प्रसार करते रहे थे. आज़ादी के बाद इस काम को और गति मिलनी चाहिए थी लेकिन पिछली सरकारों ने ऐसा नहीं किया. अब मोदी आए हैं, जो स्वयं योगी हैं. उन्होंने योग को दुनियाभर में फैलाने के उद्देश्य से संयु्क्त राष्ट्र में योग दिवस का प्रस्ताव दिया जिसे दुनियाभर से समर्थन मिला."

क्या भारत की सरकार लोगों पर थोप रही है इस सवाल पर श्रीपद नायक कहते हैं, "योग दिवस भारत के लिए गौरव की बात है और सभी सरकारी अधिकारियों ने इसे सफल बनाने के लिए स्वेच्छा से दिन रात काम किया है."

सूर्य नमस्कार सूर्य की पूजा नहीं

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योग दिवस को लेकर अल्पसंख्यकों की नाराज़गी के सवाल पर श्रीपद नायक कहते हैं कि शुरू में विरोध हुआ था जिसे समझा लिया गया.

उन्होंने कहा, "सूर्य नमस्कार का विरोध था उसे प्रोटोकॉल से हटा दिया था. ये आसन का नाम है इसका सूर्य से संबंध नहीं है. योग करने से पहले प्रार्थना ओम से शुरू होती है. ये किसी भगवान की प्रार्थना नहीं है बल्कि ख़ुद को शांत रखने की प्रार्थना है. हमने ये भी कहा कि मंत्रोच्चार करना ज़रूरी नहीं है. हमने कहा जिन्हें ओम से दिक़्क़त है वो अल्लाह का नाम ले लें. इससे विरोध कम हो गया."

उन्होंने कहा, "जब हमने मुसलमानों को समझाया तो वो समझ गए. देवबंद जैसे बड़े संस्थान ने पहले फ़तवा दिया था जो बाद में वापस ले लिया. मुस्लिम संगठनों के लोग भी आज के कार्यक्रम में शामिल हुए. बाक़ी जो विरोध कर रहे हैं वे राजनीति से प्रेरित हैं."

ख़र्चा नहीं निवेश

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भारत सरकार ने योग दिवस के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए ख़ूब पैसा ख़र्च किया है.

लेकिन श्रीपद नायक इसे लोगों के स्वास्थ्य में निवेश बताते हुए कहते हैं, "मैं दावे से कह सकता हूँ कि हम जितना पैसा निवेश कर रहे हैं उससे ज़्यादा पैसा हम बचाएगें. हम ये अच्छे स्वास्थ्य के लिए कर रहे हैं. लोग स्वस्थ होंगे तो चिकित्सा पर उनका ख़र्च कम होगा."

'योग धर्म से परे है'

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योग को हिंदू धर्म से जोड़कर भी देखा जा रहा है. क्या योग के बहाने हिंदू धर्म का प्रचार किया जा रहा है?

इस सवाल के जवाब में नायक कहते हैं, "भारत सभी धर्मों से ऊपर हैं. योग लोगों की व्यक्तिगत भलाई के लिए है. हिंदू संत ने योग शुरू किया इसलिए ये सिर्फ़ हिंदुओं का नहीं हो गया. हम योग को धर्म से परे रखते हैं, इसका किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है."

वे आगे कहते हैं, "योग का अर्थ ही है जोड़ना. योग करने से नकारात्मकता ख़त्म होती है, सकारात्मकता आती है. इसलिए जो योग करेगा वो देश और समाज को कुछ देने की ही सोचेगा, लेने की नहीं."

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