और भी हैं 'ज़हर' मालवणी में

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मुंबई के मलाड इलाके की एक स्लम कॉलोनी मालवणी में बीते एक हफ़्ते में पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 102 मौतें हो चुकी हैं और 46 लोग अस्पताल में भर्ती हैं जिनमें से चार की हालत गंभीर है.

इन सभी मौतों का कारण ज़हरीली शराब का सेवन था और अब तक 7 अभियुक्तों में से 3 गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.

'ज़हरीली शराब' की इस ख़बर ने बीते एक हफ़्ते से अख़बारों और टीवी चैनलों पर सुर्खिया बटोर रखीं है लेकिन मालवणी के लोगों के लिए इस शराब से भी बड़े 'ज़हर' हैं जिनकी तरफ़ किसी का ध्यान नहीं है.

ज़हरीला कचरा

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मालवणी में अंदर घुसते ही आपको नज़र आएंगे कूड़े के ढेर और कूड़े के पहाड़ों के ईर्द गिर्द गड़े बांस पर बोरियां बांध के बनाए गए कामचलाऊ 'शेड' जिन्हें 'घर' आप किसी तरह नहीं कह पाएंगे.

मालवणी में 8 बाई 10 साईज़ की तकरीबन 500 ऐसी झुग्गियां है जिनमें एक ही परिवार के कम से कम 5 से 6 सदस्य रहते हैं.

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35 वर्षीया नसीम अंसारी ने इस हादसे में अपने पति को खोया लेकिन फ़िलहाल चिंता उसके जाने की नहीं है, चिंता है तो अपने 3 साल के बच्चे की.

वो कहती हैं, "मेरे झुग्गी में आवारा कुत्ते घुस आते हैं, बारिश का समय है, उनके साथ गंदगी-कीचड़ भी आता है जो कई बार मेरे छोटे बच्चे के मुंह में चला गया है. अभी उसे हैजा हो गया है और मेरे पास दवाई के पैसे नहीं हैं."

पानी है ज़हर

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इन झुग्गियों में पीने के पानी की लाईनें डली हुई नहीं है ऐसे में मालवाणी के लोगों को पीने का पानी कनस्तरों में भरना पड़ता है और कई बार वो बारिश का पानी भरने पर भी मजबूर हुए हैं.

इलाके में साफ़ सफ़ाई की कमी के चलते इन कनस्तरों में कई बार छिपकली, चूहे, बिल्ली या कुत्ते जैसे जानवर घुस जाते हैं और पानी दूषित हो जाता है.

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50 वर्षीया रेशमा के पड़ोस में ही ज़हरीली शराब से एक मौत हुई है और शराब से हुई मौतों पर मीडिया के आने से वो हैरान हैं.

वो कहती हैं," ज़हरीली शराब तो आज की बात है साहब, तीन महीने पहले बस्ती के हर परिवार का कम से कम एक सदस्य पेट की बीमारी से अस्पताल में था क्योंकि हमने जो पानी पीने के लिए भरा उसमें सीवर का पानी मिल गया था. उस वक़्त तो मीडिया नहीं आया"

'ज़हर' किसका ?

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बीएमसी के मुताबिक कूड़े के ढेर हटाने के लिए वो काम कर रहे हैं और ये समस्या बड़ी इसलिए है क्योंकि इस इलाके में कबाड़ी का काम करने वाले कई लोग हैं और वो अजैविक कचरा भी यूं ही फ़ैला देते हैं.

पीने के पानी में सीवर का पानी आ जाने की बात मानने से अधिकारियों नें मना कर दिया.

इसके अलावा, मालवणी कि गलियों में अभी सड़कें नहीं हैं और सड़कें नहीं होने की वजह से हर रास्ते पर चार इंच मोटी कीचड़ की परत जम गई है ऐसे में मानसून में डेंगू और मलेरिया तेज़ी से फ़ैल रहा है, 'ज़हरीली शराब' से भी ज्यादा तेज़ी से.

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