कर्नाटकः लोकायुक्त ख़ुद आरोपों के घेरे में

जस्टिस वाई भास्कर राव इमेज कॉपीरइट Bangalore News Photos
Image caption कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस वाई भास्कर राव

एक वक़्त था जब कर्नाटक में लोकायुक्त भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई का प्रतीक बन चुका था.

जब राज्य के एक लोकायुक्त ने एक मुख्यमंत्री और उनके कुछ मंत्रियों को अवैध लौह अयस्क खनन घोटाले में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में जेल भेज दिया तो उनकी ख्याति पूरे देश में फैल गई.

आज ये हाल है कि राज्य के वर्तमान लोकायुक्त जस्टिस वाई भास्कर राव ने उनके परिवार के लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बावजूद पद छोड़ने से इनकार कर दिया है.

उनके कुछ रिश्तेदारों पर आरोप है कि वो संदिग्ध भ्रष्ट अफ़सरों से फिरौती लेने का रैकेट चला रहे थे.

जस्टिस राव ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "मैंने राज्य सरकार को जांच कराने के लिए लिखा है. अगर जाँच में साबित होता है कि मैं दोषी हूँ तो मैं इस्तीफ़ा दे दूँगा लेकिन बेबुनियाद आरोपों पर नहीं."

गंभीर आरोप

Image caption जस्टिस संतोष हेगड़े ने राव से पद छोड़ने की माँग की है.

राव के इस्तीफ़े की मांग करने वाला कोई और नहीं बल्कि पूर्व लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े हैं जिन्होंने इस पद को इतना सम्मान दिलाया था.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस हेगड़े ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "उनके(राव के) परिवार के लोगों के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगे हैं. उन्हें तत्काल पद छोड़ देना चाहिए. अगर जाँच में उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिलता तो वो दोबारा वापस आ सकते हैं."

लोकायुक्त की तरफ़ से जारी एक प्रेस नोट के अनुसार 'कृष्णा राव' नामक व्यक्ति ने बैंगलुरु ज़िला परिषद के लोक निर्माण विभाग(पीडब्ल्यूडी) के एक एग्जक्यूटिव इंजीनियर 'कृष्णमूर्ति' को लोकायुक्त के दफ़्तर में बुलाया और उससे उसपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच बंद करने के लिए 1 करोड़ रुपए घूस मांगी.

राज्य के उप-लोकायुक्त सुभाष अडी कहते हैं, "कृष्णमूर्ति को लोकायुक्त दफ़्तर के पहली मंजिल पर ले जाया गया और उससे घूस मांगी गई. उसका कहना था कि उसने क़रीब एक हफ़्ते पहले ही ज्वाइन किया है और ऐसा कुछ नहीं है जिसकी जाँच की जाए. लेकिन उससे कहा गया कि उसके ख़िलाफ़ काफ़ी मैटेरियल है."

अडी ने बताया, "मोलतोल के बाद 25 लाख रुपए पर बात तय हुई. बाद में कृष्णमूर्ति ने लोकायुक्त पुलिस एसपी सोनिया नारंग से शिकायत की."

जाँच का आदेश

इमेज कॉपीरइट karnataka.gov.in
Image caption कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(बाएँ).

कृष्णामूर्ति ने कोई लिखित शिकायत नहीं की लेकिन एसपी नारंग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मौखिक शिकायत के आधार पर मामले की विधिवत जाँचकर अपनी रिपोर्ट लोकायुक्त के रजिस्ट्रार को सौंप दी.

दूसरी तरफ़ आम आदमी पार्टी के एक प्रतिनिधि ने भी जस्टिस अडी से इस मामले में शिकायत दर्ज करायी थी. जब जस्टिस अडी ने एसपी नारंग से इस मामले की जाँच करने का कहा तब उन्हें बताया गया कि इस मामले की जाँच पहले ही हो चुकी है.

जस्टिस अडी कहते हैं, "लोकायुक्त को रिपोर्ट दिए हुए क़रीब 45 दिन हो चुके थे. जब ये रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई तो मैंने उन्हें इस बारे में पत्र लिखा. वो चाहते थे कि इस मामले की जाँच एक दूसरा आईजीपी करे. तब मैंने दोनों आईजीपी से कहा कि इस मामले की पूरी जाँच जरूरी है क्योंकि इस संस्था की पूरे देश में बहुत इज़्ज़त है."

कौन करे जाँच?

इमेज कॉपीरइट PTI

पिछले हफ़्ते लोकायुक्त ने एक प्रेस वार्ता बुलाकर बताया कि वो इस मामले की जाँच बैंगलुरु पुलिस के सिटी क्राइम ब्रांच(सीसीबी) को सौंप रहे हैं.

लेकिन सीसीबी प्रमुख ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उनके रिश्तेदार पर लगे आरोपों की जाँच लोकायुक्त कर रहे हैं इसलिए उनका इस मामले की जाँच करना सही नहीं होगा.

इसके बाद जस्टिस राव, जस्टिस अडी के इस प्रस्ताव पर सहमत हुए कि इस मामले की जाँच राज्य सरकार की तरफ़ से नियुक्त किसी संस्था जैसे सीबीआई से करवाना सही रहेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार