दिल्ली मेट्रो हमेशा चमचमाती कैसे रहती है?

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दिल्ली मेट्रो में हर दिन 20 लाख से अधिक लोग सफ़र करते हैं.

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पिछले कई वर्षों से ये सुबह 6 बजे से रात 12.30 बजे तक यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचा रही है.

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दिल्ली में मेट्रो के कुल 8 डिपो हैं जिनमें रात 11 बजे से 1 बजे के बीच ट्रेनें अपनी मेंटेनेंस के लिए आती हैं. यमुना बैंक डिपो में हर दिन 40 ट्रेनें आती हैं.

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दिल्ली में क़रीब 208 मेट्रो ट्रेनें हैं और किसी भी डिपो में लगभग 100 कर्मचारी प्रतिदिन इन ट्रेनों की सफाई करते हैं. सामान्य तौर पर एक ट्रेन को तैयार करने में 20 घंटे का समय लगता है.

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मेट्रो का रख-रखाव दो भागों में होता है. पहला, हाउसकीपिंग या बाहरी साफ-सफाई का होता है. डिपो में आने के बाद सबसे पहले स्वाचलित मशीन से मेट्रो की धूल मिट्टी की सफाई होती है.

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हाउसकीपिंग का काम करने वाले कर्मचारी की ड्यूटी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक होती है.

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ट्रेन में आई गड़बड़ी को कहां ठीक किया जाएगा, इसका निर्णय कंट्रोल रूम में लिया जाता है. उसी के अनुसार ड्राइवर को निर्देश दिए जाते हैं कि वे ट्रेन को किस ट्रैक पर खड़ा करें.

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टेलिकॉम ऑपरेशन, सिग्नल सिस्टम, इलेक्ट्रिक मेंटेनेंस के कारण दिल्ली मेट्रो को 24 घंटे चलाना संभव नहीं है.

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मेट्रो के रखरखाव का दूसरा भाग है उसका तकनीकी पक्ष, जिसमें सॉफ्टवेयर अपडेट, इलेक्ट्रिक सप्लाई, एयर कंडीशन, पहियों की देखभाल, कोच की बॉडी इत्यादि शामिल हैं.

मेट्रो के इंजीनियर हर ट्रेन की बारीक जांच-पड़ताल करते हैं. सामान्य निगरानी में इन तकनीकी ख़राबियों का पता नहीं चलता.

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