'सरकार को कुछ नहीं पता पुलिस के बारे में'

अर्द्धसैनिक बल

भारत सरकार ने अर्धसैनिक बलों के लिए योग को ज़रूरी बना दिया है.

गृह मंत्रालय ने सभी अर्धसैनिक बलों से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है कि अब तक इस फैसले को लागू करने की दिशा में क्या कुछ किया गया.

बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक गौतम कौल से बात कर समझना चाहा कि यह फ़ैसला लागू करना कितना व्यवहारिक होगा?

रास्ते में कैसे करेंगे कसरत?

इमेज कॉपीरइट EPA

अर्धसैनिक बलों में प्रशिक्षण के दौरान योग तो बहुत पहले से है. शारीरिक प्रशिक्षण में इसे भी शामिल किया गया है.

लेकिन जब आप किसी ऑपरेशन के लिए जाते हैं तो योग नहीं किया जा सकता.

जब जंगलों में रहना पड़ता है तो वहां किसी को ख़ास मौका मिल जाए तभी वह योग कर सकता है और उसके लिए आदेश की ज़रूरत नहीं है.

यह तो खुद की भावना होती है कि स्वस्थ रहना है तो जो प्रशिक्षण के दौरान सिखाया जाता है वह इस्तेमाल हो जाता है.

इमेज कॉपीरइट AFP

इस तरह के आदेश गृह मंत्रालय को जारी नहीं करने चाहिए. इससे पता चलता है कि उन्हें कुछ भी नहीं पता कि पुलिस किस तरह काम करती है.

ऑपरेशन ड्यूटी के दौरान आरान करने या कसरत करने के लिए अलग से छुट्टी नहीं मिलती. जब आप किसी ऑपरेशन में जा रहे हैं तो आपकी ज़िंदगी-मौत का सवाल होता.

जब आप पूरी तरह से हथियारों से लैस होते हैं तो आपको उनकी रक्षा करनी होती है. आपको जहां मौका मिलता है आप वहां नाश्ता कर लेते हैं या कसरत कर लेते हैं. यह रोज़ के जो क़ायदे क़ानून होते हैं उस वक्त छोड़ दिए जाते हैं.

'कहीं छर्रा न आ जाए'

इमेज कॉपीरइट

योग एक बहुत अच्छी चीज़ है लेकिन उसका पालन गृह मंत्रालय के आदेश से नहीं होगा. अर्धसैनिक बलों की ड्यूटी इतनी ज़्यादा लगाई जा रही है कि आराम का समय लगातार कम होता जा रहा है.

हर अर्धसैनिक बल के अपने नियम हैं अपनी परिस्थितिया हैं. आईटीबीपी की तैनाती पहाड़ों पर है, वहां उनके कपड़े ऐसे होते हैं कि वह न तो उतार सकते हैं और ही उनमें योग किया जा सकता.

बीएसएफ़ की तैनाती रेत में है जहां वह कपड़े उतारकर योग कर सकते हैं लेकिन कुछ पता नहीं कि सीमा में पड़ोस से कोई छर्रा आ जाए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार