गुजरात बाढ़ में बहने के बाद शेरों को लेकर चिंता

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पिछले हफ़्ते गुजरात में आई बाढ़ में जहां 70 से अधिक लोग मारे गए, वहीं हज़ारों की संख्या में वन्य प्राणी और पशु भी इसके चपेट में आए.

गुजरात के सौराष्ट्र इलाक़े में जहां बाढ़ आई, वहां गिर नेशनल पार्क भी है.

बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित अमरेली ज़िला हुआ है. यह वही इलाक़ा है जहां गिर के शेरों ने जंगल से बाहर निकल कर अपना घर बनाया है.

भारी बारिश की वजह से इस इलाक़े में 600 से अधिक गांव डूब गए हैं.

गंभीर मामला

वन विभाग के मुताबिक़ अभी तक नौ शेर और पांच हज़ार से ज़्यादा दूसरे जानवरों के शव मिले हैं.

राजन जोशी जंगल से बाहर रह रहे शेरों के लिए अमरेली में एक नेचर क्लब चलाते हैं.

जोशी का कहना है, "सौराष्ट्र की सबसे बड़ी नदी शेत्रुंजी में बाढ़ आई थी जो इस इलाके की जीवन रेखा है."

वो बताते हैं, "बाढ़ के दौरान 20 फ़ीट तक ऊंची लहरें आईं जो अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को बहा ले गई. इसमें कई सारे शेर, नील गाय, हिरण और दूसरे जंगली जानवर भी शामिल थे."

शेरों की मौत का मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि एशियाई शेरों की ये प्रजाति सिर्फ़ गुजरात में है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ अभी इन शेरों की संख्या क़रीब 523 हैं जबकि 2010 की गिनती में 411 शेर ही इस क्षेत्र में पाए गए थे.

सरकार के मुताबिक़ पिछले पांच सालों में अलग-अलग हादसे और प्राकृतिक मौत से 275 शेर मरे हैं.

अमरेली और भावनगर के जंगल और गावों में क़रीब 140 शेर रहते हैं.

सतर्कता

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जूनागढ़ वन्य-जीव विभाग के मुख्य वन संरक्षक अनिरुद्ध सिंह कहते हैं कि शेर पहली बार इस तरह मारे गए हैं जो चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा, "इस हादसे से हमें सचेत होने की ज़रूरत है. गुजरात सरकार ने सौराष्ट्र में शेरों की बढ़ती आबादी और जंगल से बहार निकले शेरों की सुरक्षा के लिए एक टास्क फ़ोर्स बना रखा है. यह फ़ोर्स इस हादसे की जांच करेगी."

उनका कहना है कि अमरेली में मोटे तौर पर सभी शेरों को ढूंढ लिया गया है और सिर्फ़ दो-तीन शावक नहीं मिले हैं. लेकिन इलाक़े के लोग मानते है कि मरने वाले शेरों की संख्या और अधिक है.

अमरेली के लिलिया में रहने वाले मनोज जोशी पेशे से अध्यापक है और वन्य प्राणी के संरक्षण के लिए भी काम करते हैं.

वे कहते हैं, "बाढ़ की वजह से खेतों में 10 फ़ीट तक मलबा जमा है. ऐसे में शेर क्या हाथी भी दबा हो तो पता नहीं चलेगा. जितनी भयंकर बाढ़ थी उसे देखकर तो यही लगता है कि कई और शेर नदी में बह गए हैं. इसलिए सही आंकड़ा पाने के लिए सरकार को शेरों की गिनती इस इलाक़े में दोबारा करनी चाहिए.”

दबाव

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बारिश की वजह से इलाक़े में कई जगह शेर हाईवे और मंदिरों के आस-पास पाए गए थे.

जोशी का कहना है, "शेर हमारे लिए गर्व का दूसरा नाम है. हमने वन विभाग को बार-बार पत्र लिख कर कहा कि शेर इस इलाके में असुरक्षित है और ख़ासकर बारिश के मौसम में उन्हें नदी से दूर ले जाया जाए लेकिन उन्होंने एक न सुनी. अब हम मरे हुए शेर और बाक़ी बचे हुए शेरों की सलामती के लिए एक यज्ञ कर रहे हैं."

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से कुछ शेर मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर जंगल में भेजने लिए कहा था. लेकिन गुजरात सरकार ने इस फ़ैसले पर असहमति दिखाई थी.

बाढ़ में शेरों की इस मौत से गुजरात सरकार पर शेरों को मध्य प्रदेश भेजने के लिए दबाव बन सकता है.

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