महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर

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महाराष्ट्र के करीब चार हज़ार रेजिडेंट डॉक्टर महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ़ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) की अपील पर गुरुवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं.

डॉक्टरों की हड़ताल से राज्य के लाखों मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है.

हड़ताल का राज्य के 14 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और मुंबई महानगर पालिका की ओर से संचालित तीन अस्पतालों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है.

बैठक बेनतीजा

बुधवार शाम राज्य के मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर विनोद तावड़े के साथ हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलने पर रेजिडेंट डाक्टर ने हड़ताल पर जाने का फ़ैसला किया.

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सागर मुंदडा के मुताबिक सरकार के साथ लगातार बातचीत और पत्र व्यवहार के बाद भी उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं, इस वजह से उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा.

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डॉक्टर भत्ता बढ़ाने, महिला डॉक्टरों को दो महीने की पेड मैटरनिटी लीव, डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरा लगाने जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए हैं.

गुरुवार सुबह आठ बजे यह हड़ताल शुरू हुई. इसके बाद राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लाइनें बढ़ने लगी.

हजारों मरीज इलाज के इंतजार में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की राह देख रहे हैं.

सेवाएं प्रभावित

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Image caption डॉक्टर स्कॉलरशिप बढ़ाने और अस्पतालों में सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर हड़ताल पर गए हैं.

मुंबई के जेजे अस्पताल के डीन डॉक्टर तात्याराव लहाने ने बीबीसी को बताया, "हमारे अस्पताल पर इस हड़ताल का कोई असर नहीं है. हमारे यहाँ अधिकतर फ़ुल टाइम डॉक्टर हैं, ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर हड़ताल का कोई असर नहीं है.''

लहाने ने हड़ताली डॉक्टरों से काम पर लौट आने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर हड़ताल कुछ दिन और चली तो अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा जाएगी.

विनोद तावड़े ने ट्वीट कर रेजिडेंट डॉक्टरों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है.

उन्होंने कहा, ''मैं रेजिडेंट डॉक्टरों से अपील करता हूँ कि मरीजों को ध्यान में रखते हुए हड़ताल वापस ले ली जाए. सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूवर्क विचार कर रही है.''

वहीं डॉक्टर सागर मुंदडा ने कहा, ''जब तक इस बारे में लिखित आश्वासन नहीं मिलता तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी.''

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