काले धन को छह बिंदुओं में समझिए

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विदेशों में जमा भारतीयों का काला धन वापस लाने के लिए भारत सरकार ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक कंप्लायंस विंडो की सुविधा दी है.

इसके तहत इन तीन महीनों के अंदर कोई व्यक्ति अगर अपने काले धन के बारे में जानकारी देगा, तो उस पर 30 प्रतिशत टैक्स और 30 प्रतिशत ज़ुर्माना लगेगा. लेकिन इस अवधि के बाद काला धन पकड़े जाने पर टैक्स का तीन गुना जुर्माना देना पड़ेगा.

इस योजना का सारा जोर विदेशों में जमा काले धन पर है, लेकिन देश के भीतर भी काले धन की एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है. ऐसे में भारत सरकार की इस पहल का कितना असर पड़ेगा क्योंकि पिछली सरकार भी ऐसे ही प्रयास कर चुकी है.

बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने टैक्स मामलों के जानकार देवेंद्र मिश्र से काले धन से जुड़े तमाम पहलुओं को समझने की कोशिश की.

लोग विदेशों में जमा काला धन क्यों घोषित करना चाहेंगे?

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अगर इस मौके पर जो व्यक्ति अपनी संपत्ति घोषित नहीं करेगा, बाद में उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक अप्रैल 2016 से आयकर रिटर्न में विदेशी संपत्तियों और खातों का विवरण देना होगा. इसके बाद पकड़े जाने पर 90 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा अधिकतम 10 वर्ष की सज़ा का भी प्रावधान है.

क्या इस बार भारत सरकार वाकई गंभीर है?

ये तो जगजाहिर है कि विदेशों में भारतीयों की काफ़ी संपत्ति है, ये जमा धन के रूप में है या अचल संपत्ति के रूप में है.

काला धन वापस लाने के लिए पिछली सरकार ने काफी प्रयास किया था, लेकिन यह केवल भारत सरकार की सदिच्छा पर निर्भर नहीं करता बल्कि विदेशी सरकारों का सहयोग भी ज़रूरी है.

मसलन वर्ष 2017 में एक समझौता होने जा रहा है, जिसमें 90 देश सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए सहमत हो गए हैं. शायद सरकार की हालिया पहल उसी की तैयारी है. एक किस्म का डर दिखाने की कोशिश भी है कि दो साल बाद अगर काले धन की सूचना मिली तो ज़्यादा जोख़िम उठाना पड़ सकता है.

जिन देशों में काला धन जमा है, उन पर अमरीका सूचनाओं के लिए दबाव डाल रहा है. क्या इस वजह से भारत का इन देशों से समझौता आसान होगा?

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अमरीका को शक है कि काले धन का इस्तेमाल चरमपंथ की फंडिंग के लिए हो रहा है. लेकिन बाहर के जितने देश हैं, उनकी अलग नीतियां हैं, उनके आय के अपने -अपने स्रोत और व्यवस्थाएं हैं.

ऐसे में यह दबाव इस बात पर निर्भर करता है कि इससे उनकी आंतरिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा. ऐसा लग रहा है और माहौल भी बन रहा है कि दो साल बाद वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कई देश सहमत हो जाएंगे.

काला धन देश के अंदर भी बहुत है. इसे निकालने के लिए सरकार क्या कुछ कर सकती है?

ये अधिनियम विदेशों में जमा धन, आय या संपत्ति से संबंधित है. जहां तक देश के अंदर काले धन की बात है तो उसके लिए पहले से ही कई क़ानून बने हुए हैं.

उन्हें प्रभावी तरीक़े से लागू करने की ज़रूरत है. यदि ऐसा होता है तो देश के अंदर जो काला धन है उसे आराम से निकाला जा सकता है.

यूपीए सरकार ने भी काला धन घोषित करने की एक स्कीम चलाई थी. उसका नतीजा क्या रहा?

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यूपीए सरकार के दौरान स्वैच्छिक रूप से काला धन घोषित करने की वॉलेंटिरी डिसक्लोज़र ऑफ इनकम स्कीम (वीडीआईएस) चलाई गई थी, लेकिन यह बहुत सफल नहीं हो पाई. हालांकि कुछ लोगों ने अपनी संपत्ति घोषित की लेकिन अपेक्षा के अनुरूप यह स्कीम सफल नहीं हो पाई.

देश में काले धन की एक तरह से समानांतर अर्थव्यवस्था है. ये काला धन लोग आखिर लगाते कहां हैं?

जिनके पास अघोषित धन है, वो भारत में अचल संपत्तियों में अपना धन लगाते हैं. देश में काले धन का एक बड़ा हिस्सा रियल इस्टेट में लगता है.

हीरे जवाहरात का व्यवसाय भी काले धन को सफ़ेद करने का एक माध्यम है. काले धन का कुछ हिस्सा सोने के आभूषणों में भी लगता है.

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