वो लहूलुहान थी, लेकिन लोग फोटो खींच रहे थे..

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Image caption आईएएस नीरज के पवन क्लिनिकल साइक्लॉजिस्ट भी हैं.

राजस्थान सरकार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहायक निदेशक आईएएस नीरज कुमार पवन सोमवार को सड़क हादसे में घायल एक युवती को लेकर एसएमएस अस्पताल पहुँचे.

वहां उन्हें बेहद कड़वे अनुभव हुए. इस घटना को सोशल मीडिया पर भी ख़ूब शेयर किया जा रहा है.

डॉक्टर नीरज पवन ने बीबीसी हिंदी से साझा किए अपने अनुभव

मैं अपने दफ़्तर जा रहा था. सुबह पौने दस बजे जयपुर की लालकोठी के पास हादसे का शिकार एक लड़की लहूलुहान पड़ी थी.

उसके सर से ख़ून बह रहा था, लोग फोटो खींचने और वीडियो बनाने में लगे थे, कोई उसे अस्पताल ले जाने के बारे में नहीं सोच रहा था. कुछ समझदार लोग भी थे जो शायद एंबुलेंस का इंतज़ार कर रहे थे.

देर होने और ख़ून अधिक बहने पर लड़की की जान को ख़तरा हो सकता था. मैं तुरंत उसे अपनी सरकारी गाड़ी से लेकर एसएमएस अस्पताल पहुँचा लेकिन तमाशा देख रहे लोगों में से कोई भी लड़की को सहारा देने के लिए मेरी गाड़ी में बैठने को तैयार नहीं हुआ.

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डॉक्टर ने डपटा

अस्पताल में ज़्यादा भीड़ नहीं थी, पीड़ित को देखने नर्सिंग स्टाफ़ तो आ गया लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया. मैंने एक डॉक्टर से कहा, “ज़रा लड़की को देख लीजिए”. डॉक्टर ने अजीब जवाब दिया- “हम ज़रा नहीं पूरा ही देखते हैं.”

उन्होंने लड़की को नहीं देखा. मैंने फिर ग़ुहार लगाई जो उन्होंने नज़रअंदाज़ कर दी, लड़की के चेहरे से बह रहे ख़ून को दिखाते हुए मैंने कहा, “मैं उसे सड़क से उठाकर लाया हूँ”.

इस पर डॉक्टर ने कहा- “सड़क से उठाकर लाए हो तो कोई एहसान किया है क्या”?

ये जवाब सुनकर मैं लड़की को लेकर दूसरे डॉक्टर के पास गया जिन्होंने मरहम-पट्टी की.

मुझ से दवाइयाँ लाने के लिए कहा गया. मैंने कहा कि दवा तो मुफ़्त मिलती है. इस पर डॉक्टर ने कहा लेकिन “लेकर तो तुम्हें ही आनी होगी”.

मैंने अनुभव किया कि आम आदमी को अस्पताल में कैसे व्यवहार का सामना करना पड़ता है.

जब ऐसा व्यवहार अस्पताल में होगा तो सड़क पर घायल पड़े किसी मरीज़ को कोई अस्पताल उठाकर क्यों लाएगा?

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Image caption डॉक्टर पवन ने मंगलवार को ट्रामा सेंटर के सभी डॉक्टरों के साथ बैठक की.

बाद में क्या हुआ?

डॉक्टर नीरज कुमार पवन ने घटना की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री को दी जिन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को वहाँ से हटा दिया है.

इस घटना के बाद मंगलवार को डॉक्टर नीरज पवन ने अस्पताल के डॉक्टरों के साथ बैठक की जिसमें सभी डॉक्टरों से व्यवहार सुधारने के लिए कहा.

साथ ही एक सप्ताह के भीतर सभी डॉक्टरों का आई-कार्ड पहनना अनिवार्य कर दिया गया है.

अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे.

(बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बातचीत पर आधारित)

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