आवारा कुत्तों को मारना 'सही'

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केरल में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए हुई सर्वदलीय बैठक इस नतीजे पर पहुंची है कि पागल और आक्रामक कुत्तों को मारना कानूनी तौर पर उचित है.

हालांकि अपनी तरह की इस अनूठी बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए लिए इस निर्णय का पशु अधिकार कार्यकर्ता पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने बीबीसी हिंदी को बताया, " बैठक में ये बात सामने आई कि पागल और आक्रामक कुत्तों को मारने के लिए कानूनी प्रावधान हैं. इस मसले पर आगे काम करने के लिए मैंने मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक बुलाई है."

उन्होंने कहा, " पिछले एक साल में सिर्फ़ तिरुवनंतपुरम में 4000 लोगों को कुत्तों ने काटा."

कुत्तों का काटना एक समस्या

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Image caption केरल के मुख्यमंत्री चांडी

मुख्यमंत्री की ये बात तथ्य आधारित है क्योंकि रिपोर्टों के मुताबिक तिरुवनंतपुरम और कोच्चि जैसे प्रमुख शहरों के अलावा भी कई इलाकों में आवारा कुत्ते और कुत्तों का काटना एक समस्या बन गई है.

लेकिन पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले में आवारा कुत्तों को मारने का कोई प्रावधान नहीं है.

केरल में एनिमल बोर्ड ऑफ इंडिया की अधिकारी सैली कन्नन का कहना है, " रेबीज़ से पीड़ित कुत्तों के केस में भी, उन्हें मारने की एक प्रक्रिया है."

कचरा प्रबंधन से जुड़ी है ये समस्या

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पशु अधिकार कार्यकर्ता रंजनी हरिदास ने कहा, " आप ये कैसे पहचानेंगे कि कोई कुत्ता आक्रामक है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि 'हिंसक' या 'आक्रामक' कुत्ता बहुत अस्पष्ट शब्द हैं.

कन्नन ने मुताबिक," दरअसल हो ये रहा है कि अगर किसी इलाके में एक आक्रामक कुत्ता है तो उस इलाके के सभी कुत्तों को उठा लिया जाता है और मार दिया जाता है. लेकिन सरकार कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में कुछ नहीं करना चाहती."

बहरहाल चांडी ने कहा, " कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर भी शुक्रवार को होने वाली बैठक में चर्चा होगी."

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