रेप केस में समझौते का विवादित आदेश वापस

मद्रास हाई कोर्ट ने एक बलात्कारी और पीड़िता के बीच मध्यस्थता का निर्देश देने का अपना विवादास्पद आदेश वापस ले लिया है.

साथ ही, मद्रास हाई कोर्ट ने अभियुक्त को दी गई अग्रिम जमानत भी रद्द कर दी है. कोर्ट ने अभियुक्त को 13 जुलाई तक सरेंडर करने को कहा है.

इस आदेश की सुप्रीम कोर्ट और कानूनी जानकारों ने आलोचना की थी. साथ ही पीड़िता ने भी इसे मानने से इनकार कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों मद्रास हाई कोर्ट के इस निर्णय को गलत बताते हुए कहा था कि यह महिला के सम्मान के ख़िलाफ है.

बताया था अलग नज़रिया

पिछले महीने मद्रास हाई कोर्ट के जज पी देवदास ने मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने एक अलग नजरिया अपनाते हुए बलात्कार के एक अभियुक्त को ये कहते हुए अंतरिम जमानत दे दी कि वो बलात्कार पीड़िता से समझौता कर सके.

इस फैसले का पीड़िता ने विरोध किया था. वी. मोहन पर साल 2002 में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप करने का आरोप लगा था, जिसके बाद कुड्डोलौर की महिला कोर्ट ने उसे सात साल कैद और दो लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश भी दिया था.

फैसले के ख़िलाफ की गई थी अपील

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मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करने वाली वकील गीता रामशेषन ने बीबीसी को बताया, ''पीड़िता ने साफ कहा दिया था कि वो किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगी.''

उन्होंने आगे कहा, ''जिसके बाद कुछ वकीलों ने मिलकर मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अपील की थी कि इस फैसले पर दोबारा गौर किया जाए.''

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