व्यापमं: मंत्री बोले सीएम से पूछो सुस्ती पर

बाबूलाल गौर, भाजपा नेता, मध्य प्रदेश
Image caption मध्य प्रदेश के गृह और जेल मंत्री बाबूलाल गौर

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) में हुए कथित घोटाले और उससी जुड़ी मौतों की जाँच सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है. सीबीआई की टीम भोपाल पहुंच चुकी है.

इस घोटाले से जुड़े कम से कम 34 लोगों की संदिग्ध स्थिति में मौत हो चुकी है. विपक्ष का दावा है कि इससे जुड़ी मौतों की संख्या इससे अधिक है.

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने सीबीआई जांच के आदेश के ठीक पहले भोपाल जाकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा गृहमंत्री बाबूलाल गौर से बात की थी.

पढ़ें बातचीत के चुनिंदा अंश

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आपने ख़ुद कहा है कि व्यापमं का मामला विस्तृत है लेकिन अभी तक सरकारी जाँच केवल गवाहों, रैकेटियर, छात्रों और फर्जी परीक्षार्थियों यानी तीसरे दर्जे के लोगों तक ही अटकी है. जब घोटाला हुआ उस समय जो लोग संबंधित संस्थानों में बड़े बड़े पदों पर थे उनपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

ऐसा नहीं है. ये मामला 2013 में इंदौर में नोटिस में आया. वहाँ बहुत से हॉस्टल और होटल हैं. वहाँ कुछ गड़बड़ करने वाले आंध्र प्रदेश से आए थे. पुलिस को एक गुमनाम रिपोर्ट मिली कि यहाँ पर ऐसे षडयंत्र करने वाले आए हैं.

इसके तहत जिसे डॉक्टर बनना है उसे और उसके नाम पर परीक्षा देने वाले नकली परीक्षार्थी के बीच तालमेल किया जाता है कि जिससे वो आगे-पीछे बैठते हैं. ऐसी व्यवस्था अधिकारियों द्वारा की जाती थी. परीक्षार्थी को कहा जाता था कि जिस सवाल के उत्तर न आए उन्हें खाली छोड़ देना. उसके बाद उनका आपस में 10-20-30 लाख में सेटलमेंट हो जाता है.

विधान सभा में कांग्रेस के लोगों ने प्रश्न किया तो मुझे ये सब जानकारी मिली.

पहले हमें लगा कि मामला छोटा है, इसलिए एक एसटीएफ़ बना दी गई. फिर हाई कोर्ट ने उसपर एसआईटी बना दी थी.

कोर्ट में पेश की गई नोटशीट में आईपीसी के तहत 128 लोगों के नाम हैं जिनमें राज्यपाल, मंत्री, आईएएस, आईपीएस समेत कई दूसरे लोग हैं.

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इस घोटाले में सरकार से जुड़े कई लोग शामिल थे, ऐसे में क्या ऐसा तो नहीं है कि 4-5 लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है लेकिन मामला इससे कहीं बड़ा है?

ऐसा नहीं है. मामला ये है कि एक आदमी पकड़ा जाता है तो वो दूसरे का नाम बताता है. ये एक लड़ी की तरह है और जैसे जैसे कड़ियाँ खुलती जाती हैं, लोगों को गिरफ़्त में लिया जाता है.

एक सूची सामने आई है जिसके अनुसार अब तक व्यापमं से जुड़े कुल 34 लोगों की मृत्यु हुई है? 20-30 साल की उम्र के लोगों की किसी न किसी कारण से मौत हुई है. इससे आपकी सरकार पर दबाव बढ़ा है.

अब ये मामला न्यायालय में विचाराधीन है. मृत्यु के लिए बीमारी या दुर्घटना जैसे कई कारण हो सकते हैं. ये जाँच के बाद ही पता चलेगा कि मुख्य कारण क्या थे.

2008-09 में मेडिकल पीएमटी का मामला राज्य विधान सभा में उठाया गया था. उस समय भाजपा की सरकार थी, फिर इतने सालों तक जाँच में सक्रियता क्यों नहीं दिखाई गई?

मैं उस समय इस विभाग का मंत्री नहीं था. मैं 2014 से इस विभाग में आया हूँ.

आप भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में हैं, उस समय भी सरकार भाजपा की थी, उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास इसका कार्यभार था?

तो ये सवाल आप मुख्यमंत्री से पूछिए. मुझे तब की कुछ जानकारी नहीं है, मुझे 2014 से बाद की जानकारी है. उसके बाद ही मैंने विधान सभा में जवाब दिए हैं.

हमें तो अख़बारों में ज़्यादा जानकारी मिलती है. क्योंकि विभाग ने जाँच करने वाले सभी अधिकारियों को कह दिया है कि किसी राजनेता को इसकी जानकारी न दी जाए. हमसे तो वो मिलते भी नहीं हैं.

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