मोदी सरकार को सुझाव देंगे, पर वापसी नहीं: पित्रोदा

सैम पित्रोदा

डिजिटल इंडिया अभियान क्या एक आम भारतीय की ज़िंदगी आसान कर सकता है?

भारत में टेलीकॉम क्रांति के जनक माने जाने वाले सैम पित्रोदा ने शिकागो से बीबीसी हिंदी गूगल हैंगआउट में इस सवाल पर अपनी राय रखी.

साथ ही पित्रोदा ने मोदी सरकार के इस मिशन पर आम लोगों की शंकाओँ का जवाब भी देने की कोशिश की.

राजीव गांधी के सलाहकार रह चुके पित्रोदा मोदी सरकार को अपने सुझाव देने को तो तैयार हैं लेकिन वो कोई पद लेने को उत्सुक नहीं है.

पित्रोदा ने कहा, "हम वापस नहीं आएँगे, हमें कोई पद नहीं चाहिए लेकिन एक नागरिक के रूप में जो कहा जाएगा करेंगे."

आम भारतीय को फ़ायदा

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इस मिशन से एक आम भारतीय की, गांव में रहने वाले किसान की ज़िंदगी कैसे बेहतर बनेगी?

इसके जवाब में पित्रोदा ने कहा, "इस तरह की चीज़ें अपना वक़्त लेती हैं. देश बनाने में 50-100 साल लगते हैं. देश किसी कंपनी की तरह 3 साल में नहीं बनता. डिजिटल इंडिया के माध्यम से हम गाँव के बच्चों के लिए दुनिया के लिए एक खिड़की खोल देंगे."

पित्रोदा ने आगे कहा, "ब्रांडबैंड से किसान को या अस्सी साल की बुज़ुर्ग महिला को भले ही तुरंत फ़ायदा नहीं होगा, लेकिन उनके बच्चों और पोतों को फ़ायदा होगा."

'नेटवर्क में पैसा लगाना होगा'

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बीबीसी ने पित्रोदा से पूछा कि भारत में जहां फ़ोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी और कॉल ड्रॉप जैसी मूलभूत समस्या है वहां डिजिटल इंडिया जैसी महत्तवाकांक्षी योजना कैसे कामयाब होगी?

जवाब में पित्रोदा बोले, "हमारे यहाँ नेटवर्क पर ख़र्च ज़्यादा है. मान लीजिए हमने 20 हज़ार लोगों के लिए नेटवर्क बनाया है, लेकिन 40 हज़ार यूज़र को फ़ोन कनेक्शन दे दिए हैं. नेटवर्क में ज़्यादा पैसा लगाना होगा, इससे मोबाइल की कॉल का ख़र्च बढ़ेगा, लेकिन कनेक्टिविटी सुधरेगी."

(देखिए: सैम पित्रोदा के साथ गूगल हैंगआउट)

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