असम में हिन्दीभाषियों की हत्या से नाराज़गी

बांग्लादेश सीमा पर गश्त लगाते भारतीय सुरक्षा बल (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters

असम में दो हिन्दीभाषियों की हत्या के बाद अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ़ असम (उल्फा) के कैडरों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने बुधवार से व्यापक अभियान शुरू किया है.

इसके तहत असम-अरुणाचल के सीमावर्ती जंगलों में उल्फा के कैडरों की तलाश की जा रही है.

पुलिस के मुताबिक़ उल्फा के तीन संदिग्ध कैडरों ने मंगलवार को ऊपरी असम के तिनसुकिया ज़िल के पेंगेरी इलाक़े में एक हिंदीभाषी कारोबारी के परिवार पर हमला कर 65 साल के नंदलाल साह और उनकी 21 साल की बेटी काजोल की हत्या कर दी थी.

हमलावरों की गोली से घायल हुईं साह की पत्नी मोती देवी, बेटे मनोज और भतीजे अक्षयलाल साह का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है.

अभी तक उल्फ़ा या किसी भी संगठन ने इन हत्याओं की जिम्मेदारी नहीं ली है.

विरोध-प्रदर्शन

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बुधवार को भोजपुरी युवा छात्र परिषद ने ज़िले के विभिन्न स्थानों पर सड़क जामकर विरोध जताया. प्रदर्शकारियों पर हुए लाठीचार्ज में घायल हुए दीनबंधु शर्मा की अस्पताल में मौत हो गई.

व्यापारी की हत्या के विरोध में परिषद ने गुरुवार सुबह पांच बजे से 36 घंटे के बंद की अपील की है. तिनसुकिया ज़िले में सुबह से ही पूरी तरह बंद है. बंद को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

पुलिस के मुताबिक़ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) आरएम सिंह अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ स्थिति पर नजर रखने के लिए पेंगेरी में डेरा डाले हुए हैं.

कानून–व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और स्थानीय लोगों के गुस्से को देखते हुए तिनसुकिया के पुलिस अधीक्षक अर्णव डेका का तबादला कर दिया गया है. उनकी जगह मुग्धज्योति देव महंत को तैनात किया गया है.

उल्फा के गढ़ रहे तिनसुकिया जिले के पेंगेरी अंचल में यह पहला मौका है जब इतनी तादाद में लोग घटना के विरोध में सड़क पर आए हैं.

पुलिस का संदेह

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इस हमले को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है. इससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. लोगों ने उल्फा के विरोध में नारेबाज़ी की.

असम पुलिस ने एक बयान जारी कर घटना के पीछे उल्फा का हाथ होने का संदेह जताया है.

पेंगेरी थानाक्षेत्र का बिजुलीबन का यह वही इलाका है, जहां उल्फा ने 2007 में बड़ी संख्या में बिहारी प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी थी.

ग्रामीणों का कहना है कि सोमवार को पुलिस के एक दल ने गांव में हिन्दीभाषियों की गिनती कर उन्हें सावधान रहने को कहा था. लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात नहीं की गई थी.

खुफिया रिपोर्ट में उल्फ़ा कैडरों की तिनसुकिया ज़िले में सक्रियता बढ़ने की बात भी सामने आती रही है.

सुरक्षा व्यवस्था

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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को गुवाहाटी में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी. जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है.

उन्होंने कहा था कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा कर कुछ टुकड़ियों को यहां से वापस बुला लिया जाएगा ताकि बाहर के लोगों में क्षेत्र के माहौल को लेकर एक सकरात्मक सोच बन सके.

लेकिन उल्फा ने यह हमला कर एक बार फिर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है.

पुलिस ने मंगलवार रात एक तलाशी अभियान चलाकर हाल में म्यांमार से प्रशिक्षण लेकर आए कानू खनिकर नाम के एक उल्फा नेता को हिरासत में लिया है.

तिनसुकिया के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एल डुंगल ने बताया कि पेंगरी घटना के बाद पूरे क्षेत्र में 7 मद्रास रेजीमेंट, दूसरी असम रेजीमेंट और सीआरपीएफ ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया है.

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