अमरीकी कंपनी ने ठेकों के लिए 'रिश्वत दी'

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अमरीका के न्यू जर्सी की कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट कंपनी लुई बर्जर पर भारतीय अधिकारियों को कई करोड़ रुपये की रिश्वत देने के मामले में आरोप तय हुए हैं.

इस कंपनी ने कथित रूप से ये रकम गोवा और गुवाहाटी में जल विकास परियोजनाओं के ठेके पाने के लिए दी थी.

आरोप है कि गोवा की एक परियोजना के लिए लुई बर्जर ने 9,76,630 डॉलर की रिश्वत दी थी और जिन लोगों को ये रिश्वत दी गई उनमें एक मंत्री भी शामिल हैं.

हालांकि अमरीकी न्याय विभाग ने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है.

भारत, इंडोनेशिया, वियतनाम और कुवैत में सरकारी ठेके हासिल करने के लिए रिश्वत देने के आरोप हटाने के बदले शुक्रवार को लुई बर्जर एक करोड़ 71 लाख डॉलर का जुर्माना देने को राज़ी हो गई.

अमरीकी अधिकारियों ने 11 पन्नों की चार्जशीट में आरोप लगाया है कि लुई बर्जर ने भारतीय अधिकारियों को जो रिश्वत दी उसका ब्यौरा एक डायरी में लिख रखा था.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि कंपनी और इसके अधिकारियों ने साल 1998 से 2010 के बीच रिश्वत दी.

दो अधिकारी भी दोषी

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लुई बर्जर ने एक बयान में कहा है कि वो ही न्याय विभाग को इसकी साल 2010 से जानकारी दे रही थी.

2010 में ही कंपनी ज़्यादा रकम वसूलने के बदले अमरीकी सरकार को छह करोड़ नब्बे लाख डॉलर देने को तैयार हुई थी.

लुई बर्जर के दो पूर्व अधिकारियों ने भी रिश्वत देने की बात कबूल की है. ये अधिकारी हैं फ़िलीपींस के 61 साल के रिचर्ड हर्श और संयुक्त अरब अमीरात के 59 साल के जेम्स मॅक्क्लंग.

मॅक्क्लंग भारत और वियतनाम में लुई बर्जर के सीनियर वाइस प्रेज़िडेंट रहे हैं. हर्श और मॅक्क्लंग को 5 नवंबर 2015 को सज़ा सुनाई जाएगी.

भारत सरकार ने जापान के सहयोग से गोवा में पानी की आपूर्ति और सीवरेज सुविधाओं के विस्तार के लिए पांच साल की गोवा जल आपूर्ति और सीवरेज परियोजना की शुरुआत की थी.

लुई बर्जर गोवा में इस परियोजना पर काम करने वाले कंसोर्टियम का हिस्सा थी. इस कंसोर्टियम में दो जापानी कंपनियां और उनकी एक भारतीय साझीदार भी थी.

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