एनआईए आरएसएस नेता से पूछताछ न कर पाई

हैदराबाद स्थित चारमीनार (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत में 2006 से 2008 तक हुए बम धमाकों की छह घटनाओं में 120 से ज़्यादा लोग मारे गए और 400 से ज़्यादा घायल हुए थे.

प्रारंभिक जांच में इन बम धमाकों में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे.

ये घटनाएँ 'भगवा आतंक' या 'हिंदू चरमपंथ' के नाम से चर्चित हुईं.

लेकिन आज तक इनमें से किसी भी मामले में किसी को भी दोषी क़रार नहीं दिया जा सका है. कई में सुनवाई तक नहीं शुरू हुई है. एक मामला तो बंद हो चुका है.

पहली क़िस्त पढ़ेंः एनआईए 'हिंदू चरमपंथ' के मामलों में नाकाम?

इन सभी मामलों की जांच भारत की प्रमुख एजेंसी एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है.

बीबीसी की इस विशेष सीरीज़ की तीसरी क़िस्त में पढ़ें 18 मई 2007 को हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए धमाके के बारे में.

मक्का मस्जिद धमाका

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Image caption हैदराबाद में फरवरी 2013 में हुए धमाके में घायल अब्दुल वासे 2007 में मक्का मस्जिद में धमाके में भी घायल हुए थे.

18 मई 2007 को हैदराबाद की मक्का मस्जिद में एक धमाका हुआ, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी.

जल्द ही, हैदराबाद पुलिस ने पूछताछ के लिए कई मुस्लिम युवकों को गिरफ़्तार कर लिया और नार्को टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर छह को जेल भेज दिया.

पढ़ें दूसरी क़िस्तः समझौता धमाके में मामला वहीं का वहीं

तीन साल बाद सीबीआई ने इस धमाके के पीछे हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं का हाथ होने की पुष्टि की.

इसने नार्को टेस्ट और हैदराबाद पुलिस के अन्य दावों को ग़लत साबित कर दिया. इसके बाद अधिकांश गिरफ़्तार मुस्लिम युवकों को ज़मानत मिल गई थी.

सीबीआई ने जिन पांच लोगों के नाम लिए इनमें सभी दक्षिणपंथी हिंदू कार्यकर्ता थे. इनमें अजमेर धमाके के अभियुक्त देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा का भी नाम था.

बाद में अप्रैल 2011 में एनआईए को यह मामला सौंप दिया गया.

एनआईए ने क्या किया?

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मक्का मस्जिद जांच में एनआईए की सुस्ती जगज़ाहिर है. सीबीआई जहां तक पहुंच चुकी थी, एनआईए ने उससे आगे जाने में मामूली दिलचस्पी दिखाई.

एनआईए ने असीमानंद समेत पांच लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल किया.

इनमें से देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा ज़मानत लेने में सफल हो गए. एनआईए ने उनकी अर्ज़ी को चुनौती नहीं दी थी.

एनआईए दो अहम आरोपियों, संदीप डांगे और रामजी कालसंग्रा को अभी तक पकड़ नहीं पाई है, न ही वह इस हमले के लिए ज़िम्मेदार स्थानीय मॉड्यूल का पता लगा पाई है.

चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट कबूलनामों पर आधारित हैं, जिनसे आरोपी मुकर रहे हैं.

विस्फोटकों की ख़रीदारी और धन का स्रोत अब भी अज्ञात है.

इससे अलावा, अभी इस मामले में असमंजस बरक़रार है क्योंकि एनआईए ने अभी तक मामले के आधे हिस्से को छुआ तक नहीं है, जो मस्जिद के पास पाए गए बिना फटे बमों से संबंधित है.

इंद्रेश कुमार से पूछताछ

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Image caption आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुखिया इंद्रेश कुमार.

एनआईए को मामला सौंपे जाने से पहले सीबीआई ने आरएसएस के एक बड़े नेता इंद्रेश कुमार से पूछताछ की थी.

इंद्रेश इस समय आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुखिया हैं.

लेकिन इस मामले में एनआईए चुप है और उनसे पूछताछ नहीं की गई है.

पिछले साल एक साक्षात्कार में कुमार से जब पूछा गया कि क्या एनआईए उनसे इसलिए नहीं पूछताछ कर रही है क्योंकि अब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आ गई है?

इस पर, उन्होंने कहा था कि वो किसी सरकार की दया पर निर्भर नहीं हैं.

(इसी सीरीज़ की चौथी क़िस्त में पढ़ें 2007 में अजमेर शरीफ़ में हुए धमाके के बारे में.)

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