'शराफ़त छोड़ दी जिसने शरीफ़ा खाएँ किस मुँह से?'

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शरीफ़ा यानी कस्टर्ड एप्पल दरअसल सीताफल है या सीताफल ही शरीफ़ा है. इस पर पिछले कुछ घंटों में जमकर ट्विटरबाज़ी हो रही है. यूज़र्स ने कई दिलचस्प ट्वीट भी किए हैं.

दरअसल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिस फल को आम तौर पर शरीफ़ा कहा जाता है, देश के कुछ दूसरे इलाकों में इसे सीताफल के नाम से भी जाना जाता है.

बस नाम को लेकर इसी बहस पर ट्वीट्स का सिलसिला चल पड़ा.

'सीताफल सब्जी'

पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने तो अपनी पोस्ट के समर्थन में एक तस्वीर भी डाली और लिखा कि पूरे बिहार में इसे शरीफ़ा कहा जाता है.

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर पुष्पेश पंत ने इस पर दिलचस्प ट्वीट किया, “गूँगा लेता गुड़ का रस अंतर्गत है शराफ़त छोड़ दी जिनने, शरीफ़ा खाएँ किस मुँह से? सीताफल कहने में सेकुलर सकुचाएँ कस्टर्ड एप्पल से काम चलाएँ!”

एक यूजर ने @rishiranjank हैंडल पर लिखा, “वो सीताफल किसी हिसाब से नहीं कहा जा सकता. सीताफल एक सब्जी होती है - इसको हम बिहार में कोंहरा बोलते हैं. शरीफ़ा एक फल है.”

एक अन्य यूजर ने @dillidurast पर दिलचस्प ट्वीट किया, “वैसे एमपी में भी सीताफल कहते हैं पर क्या करें व्यापमं के बाद कोई हमारी आवाज़ ही नहीं सुनता.”

एस शंकर ने @Sshankara पर लिखा, “इन्हें भारत मे सीताफल कहा जाता है, शायद तुर्क इन्हें शरीफ़ा कहते थे.”

इस बहस में एक और दिलचस्प ट्वीट. एक यूजर ने @rvaidya2000 पर लिखा, “उदारवादी वामपंथियों का पारिभाषिक आतंकवाद स्वीकार नहीं किया जाएगा.”

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