'देश में एक करोड़ कलाम बन जाए'

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एपीजे अब्दुल कलाम की ज़िंदग़ी दो हिस्सों में बंटी थी.

एक हिस्सा वो जिसमें उन्होंने अपनी ग़रीबी से निकलकर अपनी क़ाबिलियत और विज़न से मिसाइल तकनीक और रक्षा मामलों में अहम भूमिका अदा की.

दूसरा वो जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी भूमिका अदा की है.

वे भारत के उन करोड़ों वंचित बच्चों के लिए रोशनी बन गए थे कि देखो अगर अब्दुल कलाम यह कर सकता है तो तुम भी कर सकते हो.

इसीलिए उनकी किताबें छोटे-छोटे शहरों में बहुत लोकप्रिय हुई. वे नौजवानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए थे.

सपना

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आज की नौजवान पीढ़ी एपीजे कलाम की याददाश्त को अपनी ज़िंदगी में परचम बनाकर रखेगी.

वे एक नेता नहीं थे. वे दिल के मालिक थे. वे आपके दिमाग़ में जुनून भरते थे.

उनका सपना था कि देश में एक करोड़ कलाम बन जाए. उनमें अद्भुत विनम्रता थी.

कलाम को अपने देशवासियों पर बहुत भरोसा था. वे कहते थे कि भारत प्रतिभाओं से भरा पड़ा है इसे सिर्फ़ मौक़ा चाहिए.

एक बार मौक़ा मिल गया तो भारत कहां चला जाएगा किसी ने इसका सपना भी नहीं देखा है और न ही सोचा है.

मानवीय स्वभाव

Image caption एपीजे अब्दुल कलाम को कविता लिखने का बहुत शौक था.

उनको कविता लिखने का बहुत शौक़ था. एक बार जब मैं किसी काम से उनके पास गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर में लगे पेड़ पर एक कविता लिखी है.

वे बताने लगे कि इस पेड़ को मैं कई सालों से देख रहा हूं. इस पेड़ का चरित्र बदलता रहता है.

फिर उन्होंने वे कविता मुझे सुनाई और उस पेड़ के पास ले गए.

मैं जो बात करने गया था वे बात तो नहीं लेकिन तमाम दुनिया भर की बातें होती रही.

उनका मानवीय स्वभाव दुनिया के स्वभाव के साथ घुलमिल गया था उस शाम को.

(वरिष्ठ पत्रकार और बीजेपी के प्रवक्ता एमजे अकबर से बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय की बातचीत पर आधारित)

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