अंशु गुप्ता, संजीव चतुर्वेदी को मैग्सेसे अवॉर्ड

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रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड फाउंडेशन (आरएमएएफ) ने बुधवार को पिछले साल के पांच विजेताओं ने नाम घोषित कर दिए हैं, जिसमें भारत के संजीव चतुर्वेदी और अंशु गुप्ता शामिल हैं. संजीव चतुर्वेदी एम्स के मुख़्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) रह चुके हैं. वहीं अंशु गुप्ता दिल्ली स्थित एनजीओ गूंज के संस्थापक हैं.

एम्स के सीवीओ बनने के बाद संजीव चतुर्वेदी ने उन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जो अनाधिकृत रूप से विदेश यात्रा करते थे.

वहीं अंशु गुप्ता ने कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर 1999 में एनजीओ गूंज की स्थापना की थी.

बीबीसी संवाददाता सुशील झा से बातचीत में अंशु गुप्ता ने कहा, "मैं अवॉर्ड मिलने से ख़ुश हूँ, ख़ासकर इसलिए कि कपड़ों का मुद्दा विकास के मुद्दे से जुड़ सका. इस अवॉर्ड से ये भी साबित होता है कि बिना पोस्टर बैनर लगाए भी सामाजिक काम किया जा सकता है."

नेतृत्व क्षमता

आरएमएएफ की प्रेस रिलीज़ के अनुसार संजीव चतुर्वेदी को उनकी अप्रत्याशित नेतृत्व क्षमता के लिए चुना गया है. विज्ञप्ति के अनुसार, ''उन्होंने ईमानदारी, साहस और तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए भ्रष्टाचार की जांच की. साथ ही उन्होंने ऐसा तरीका भी विकसित किया जिससे सरकार भारतीय जनता के लिए बेहतर तरीके से काम कर सके.''

वहीं अंशु गुप्ता के लिए लिखा गया है , ''उनकी जो दूरदर्शी सोच है वो भारत में एक-दूसरे को आगे बढ़कर मदद करने की सोच को बदल रही है. उनके नेतृत्व में कपड़ों को इस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे कि वो ग़रीब वर्ग के लिए विकास का साधन साबित हो रहा है. साथ ही उन्होंने दुनिया को यह भी याद दिलाया है कि अगर असल मायने में कोई किसी को कुछ देता है तो इसमें मानवीय ग़रिमा की इज़्जत करना शामिल है.''

अंशु गुप्ता से बातचीत सुनिए

इन लोगों को भी मिला

संजीव चतुर्वेदी और अंशु गुप्ता के अलावा लाओस की कोमाली चंतावॉन्ग को भी यह अवॉर्ड मिला है जो लाओस की रेशम बुनने की प्राचनी विधा को फिर से सामने लाकर आईं और उन लोगों तक पहुंचाया जो इससे अपनी जीविका चलाते हैं.

इसके अलावा फिलीपींस की लिगाया फर्नेन्डो अमिलबांग्सा को दक्षिण फिलीपींस के लुप्तप्राय कलात्मक विरासत को बचाने का श्रेय जाता है.

वहीं म्यांमार के क्वा थू को म्यांमार में जीवित और यहां तक कि मृत व्यक्तियों के मूलभूत अधिकारों के लिए लड़ने के लिए यह पुरस्कार दिया गया है.

भारत से इन्हें भी मिला

भारत से कई लोगों को यह अवॉर्ड मिल चुका है, उनमे से चंद चर्चित नाम:

  • मदर टेरेसा, 1962
  • वर्गीस कूरियन, 1963
  • जयप्रकाश नारायण, 1965
  • सत्यजीत रे, 1967
  • किरण बेदी, 1994
  • महाश्वेता देवी, 1997
  • जेम्स माइकल लिंगदोह, 2003
  • वी. शांता, 2005
  • अरविंद केजरीवाल, 2006

क्या है ख़ास

रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड की स्थापना 1957 में फिलीपींस के तीसरे राष्ट्रपति रैमन मैग्सेसे की याद में की गई है. इसे एशिया का नोबल पुरस्कार भी कहा जाता है.

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