रामेश्वरम में सुपुर्द-ए-ख़ाक किए गए कलाम

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पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को गुरुवार को उनके गृह नगर रामेश्वरम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया.

डॉक्टर कलाम के पार्थिव शरीर को बुधवार को रामेश्वरम ले जाया गया था और हज़ारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे.

मदुरई से रामेश्वरम तक की सड़कों पर डॉ. कलाम के पोस्टर लगे हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी वहां मौजूद थे.

27 जुलाई को आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक़्त 83 वर्षीय डॉक्टर कलाम को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया था. हालांकि डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए.

सरकार ने उनकी मौत पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

मिसाइल मैन

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कलाम 2002 से 2007 से भारते के 11वें राष्ट्रपति रहे.

'मिसाइल मैन' के नाम से मशहूर डॉक्टर कलाम ने 1998 में पोखरण-2 के परीक्षण के वक्त अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

1981 में पद्म भूषण और 1990 में उन्हें पद्म विभूषण भी दिया गया था.

कलाम ने कुल 17 किताबें लिखीं थीं और उन पर छह जीवनियां भी लिखीं गईं थी.

उन्हें 40 विश्विद्यालयों से मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है.

2005 में डॉक्टर कलाम ने स्विटज़रलैंड की यात्रा की थी जिसके बाद वहां वो दिन 'विज्ञान दिवस' के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई थी.

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