याक़ूब की फांसी पर कश्मीर मौन

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मुंबई में 1993 में हुए धमाकों में अहम भूमिका निभाने के लिए दोषी पाए गए याक़ूब मेमन की फांसी पर भारत प्रशासित कश्मीर में दबी और सधी हुई प्रतिक्रिया सामने आई है.

जम्मू कश्मीर भारत का एकमात्र मुस्लिम प्रधान राज्य है.

इस इलाक़े में 9 फ़रवरी 2013 के बाद हिंसा हुई थी जब एक कश्मीरी मुस्लिम, अफज़ल गुरु को चुपके से तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया था.

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उन पर एक दशक पहले भारतीय संसद पर सशस्त्र हमले की साजिश रचने का आरोप था.

86 वर्षीय अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने मेमन की सुनवाई पर प्रश्न उठाए हैं.

उन्होंने पूछा कि "याक़ूब को फांसी पर चढ़ाया गया क्योंकि वे मुस्लिम है भारत की सत्ता में सांप्रदायिक मानसिकता वाले लोग हैं."

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटनाक्रम या फांसी के बारे में कुछ नहीं लिखा. उन्हें ट्विटर पर दस लाख से अधिक लोग फॉलो करते हैं.

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2013 में एक ट्वीट के माध्यम से अफ़ज़ल गुरू की फांसी पर पछतावा ज़ाहिर करने के लिए उमर अब्दुल्ला की व्यापक आलोचना हुई थी. वे उस समय राज्य के मुख्यमंत्री थे.

'न्यायिक हत्या'

हालांकि इस विषय से प्रभावित नागरिक युवा पेशेवर और कार्यकर्ता मेमन की फांसी की कड़े शब्दों में निंदा की. अनेक लोगों ने इसे 'न्यायिक हत्या' करार दिया.

युवा पेशेवर फिरोज़ अहमद ने ट्वीट किया, ''उठो लोगों, आज नागपुर में हो रही हत्या को देखो.... क्या न्याय की हत्या हो गई?".

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कुछ लोगों ने दिल्ली के नेशनल लॉ स्कूल के आंकड़ों को साझा किया और कहा कि पिछले दशकों में फांसी पर लटकाए लोगों में ज़्यादातर मुसलमान थे.

कईयों ने उदास कविताएँ पोस्टी की हैं. कश्मीरी बोलने वाली हिंदू रितु कौल ने एक छोटे से पोस्ट में लिखा "याकूब की आत्मा को शांति मिले".

कश्मीरी हिंदू जिन्हें आम तौर पर पंडितों के रूप में जाना जाता है उन्हें 1990 के सशस्त्र विद्रोह के बाद व्यापक पैमाने पर पलायन करना पड़ा था. समुदाय के अनेक सदस्यों को इस दौरान मार डाला गया था.

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चीन से पढ़ कर आए कार्यकर्ता डॉ पीर जीएन सुहैल लिखते हैं ''न्यायिक हत्या ने जिन्ना को सही साबित कर दिया. भारत मुसलमानों के लिए नहीं है.''.

टीवी कवरेज पर ग़ुस्सा

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इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार मुज़्ज़्मिल जमील फांसी के इर्द-गिर्द घटनाओं के पूरी रात चले टीवी कवरेज से ग़ुस्से में हैं.

वे दिल्ली के इंडियन एक्सप्रेस में कश्मीरी संपादक हैं और कहते हैं "एनडीटीवी में प्रस्तुतकर्ता बार-बार कह रहे थे-यह एक दिलचस्प रात है. वे कह रही थीं कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर गर्व है और क्या आप जानते हैं कि ''न्यायाधीश रात भर नही सो सके क्योंकि मेमन को सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाना था. उन्होंने कहा यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महान रात है''.

मेमन को फांसी दिए जाने के तुरंत बाद जमील ने ट्वीट किया.

हुसैन ज़ैदी की किताब 'ब्लैक फ्राइडे' में एक उल्लेख के अलावा याक़ूब मेनन का कश्मीर के साथ संबंध होने के कोई तार नहीं हैं.

इस किताब का दावा है कि पूर्व कश्मीरी-अलगाववादी उस्मान मजीद जो अब एक विधायक हैं, उन्होंने भारतीय ख़ुफिया वुभाग को याक़ूब के पाकिस्तान में होने की सूचना दी थी.

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लेकिन उन्होंने याक़ूब के भारत लाए जाने में किसी प्रकार की भूमिका से इंकार किया था.

एक स्थानीय अख़बार के हवाले से कांग्रेस विधायक उस्मान ने कहा है "मैं टाइगर मेमन या याक़ूब मेमन के बारे में ठीक-ठीक कुछ बता नहीं सकता. भारत सरकार के पाकिस्तान में अपने खुद की व्यवस्था है, वे जानते है कि टाइगर के घर कराची में कहां पर है. पाकिस्तान में भारत सरकार की भारी मौजूदगी है".

2002 में फ्रंटलाइन को दिए एक साक्षात्कार में मजीद ने बताया था कि कैसे वे टाइगर मेमन के नज़दीकी थे. वे उनसे कई बार उस दौरान मिले थे जब वे हथियारों के प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान गए थे. यह जम्मू कश्मीर में 1989 में उग्रवाद उपजने का बाद की बात है.

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