बाहर निकलने में डर लगता है..

meenakshi
Image caption आनंद परबत की तंग गली

दिल्ली के आनंद परबत इलाक़े में पिछले महीने एक लड़की की दिन दहाड़े निर्मम हत्या के बाद वहां रहने वाली कई लड़कियां अकेले बाहर जाने से डरती हैं.

आनंद परबत दिल्ली के कनॉट प्लेस से बिल्कुल लगा हुआ इलाका है.

मीडिया वालों को देखकर यहाँ के लोग ख़ुद आपको मीनाक्षी के घर का पता बता देते हैं.

19 वर्षीय मीनाक्षी की 16 जुलाई को इसी इलाके के दो लड़कों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी.

पुलिस ने बताया कि मीनाक्षी के शरीर में 35 बार चाकू घोंपा गया था.

इस घटना के बाद से इलाक़े में पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है, लेकिन यहां रहने वाले कई लोग अब भी सहमे हैं.

'सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीति'

Image caption मीनाक्षी के घर के सामने मीडिया वाले

कॉलेज जाने वाली 19 साल की बरखा जींस और शर्ट में आधुनिक और आत्मविश्वास से भरी लगती हैं.

लेकिन तभी तक, जब तक मैंने ये सवाल नहीं पूछा कि मीनाक्षी की हत्या के बाद क्या लड़कियों के लिए डर बढ़ा है?

मेरे इस सवाल पर बरखा कहती हैं, "यहां पर आज भी लड़के गुट बना कर खड़े होते हैं जहाँ से निकलने में डर लगता है. हमारी सुरक्षा एक बड़ी समस्या है."

वो कहती हैं, "आनंद परबत में अकेले निकलने से डर लगता है. लोग डर के मारे पुलिस से शिकायत ही नहीं करते है."

Image caption मीनाक्षी की बहन

उनका कहना है, "आजकल मीनाक्षी मर्डर के बाद पुलिस रात में गश्त तो लगाती हैं लेकिन 'निर्भया' जैसा कांड दिल्ली में हुआ तो हम कैसे भरोसा कर लें कि मीनाक्षी मर्डर में कोई इंसाफ होगा. अगर होगा तो सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीति."

'घबराहट होती है'

इस इलाके में लड़कियां ही नहीं बल्कि उनके घरवाले भी बहुत डरे हुए हैं.

47 वर्षीय अशोक कहते हैं, "लफ़ंगों से प्यार से बातें करनी पड़ती हैं ताकि हमारे साथ कोई हादसा न हो. बेटी को बाहर सामान लाने के लिए या स्कूल भेजने में भी घबराहट होती है."

Image caption मीनाक्षी की पड़ोसन कमलेश

वो कहते हैं, "असामाजिक तत्व हमेशा से ही परेशान करते रहे हैं. यहाँ पुलिस की कोई गश्त नहीं होती थी. लेकिन मीनाक्षी की हत्या के दस दिन बाद पुलिस अब दिखाई देती है."

16 वर्षीय कोमल का कहना है कि वो गली में मौजूद लड़कों की वजह से अपनी पसंद के कपड़े नहीं पहन पातीं हैं और उन्हें अकेले निकलने में घबराहट होती है.

कोमल स्कूल वैन तक अपने पापा या फिर भाई के साथ ही जाती हैं.

'बच सकती थी मीनाक्षी'

Image caption मीनाक्षी की माँ

मीनाक्षी का संबंध एक ग़रीब परिवार से था. उनके पिता मजदूर हैं और कैंसर के मरीज़ भी हैं. ऐसे में, मीनाक्षी ही घर का ख़र्चा चलाती थीं.

मीनाक्षी की मां बताती हैं, "वो पढ़ने की शौक़ीन थी लेकिन घर चलाने के लिए 11वीं के बाद वे पढ़ नहीं पाईं."

वो कहती हैं कि अगर सब सामने आते तो शायद मीनाक्षी की जान बच जाती.

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