'छात्रों की दिलचस्पी सिर्फ़ ड्रग्स' और सेक्स में

एफ़टीआईआई में निदेशक गजेंद्र चौहान का विरोध इमेज कॉपीरइट DEVIDAS DESHPANDE

इंडियन फ़िल्म और टेलीविज़न इंस्टीच्यूट या एफ़टीटीआई में छात्रों की हड़ताल 50 दिन से जारी है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

दूसरी तरफ़ प्रदर्शनकारी छात्रों पर अब हमले तेज़ होने लगे है. उन पर कई तरह के आरोप भी लगाए जा रहे हैं.

एफ़टीटीआई नियंत्रण परिषद की सदस्य अनघा घैसास ने कहा है, "ये छात्र पढ़ाई से ज़्यादा यहाँ ड्रग्स लेने और अनैतिक संबंधों में रूचि रखते हैं. इनका ख़ुद का राजनीतिक एजेंडा है."

आरएसएस पर गर्व

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अनघा आरएसएस की क़रीबी बताई जाती हैं.

संस्था के छात्र जिन लोगों की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं, उनमें गजेंद्र चौहान के अलावा अनघा घैसास, नरेंद्र पाठक, राहुल सोलपुरकर, प्रांजल सैकिया और शैलेश गुप्ता भी शामिल हैं.

एफ़टीटीआई में मेरठ के रहने वाले साउंड इंजीनियरिंग के छात्र मनीष पाल सिंह बताते हैं, "घैसास को ही देख लीजिये, जिन्हें काल्पनिक और सत्य कहानियों में कोई अंतर नहीं पता है. "

नए सदस्य

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अनघा घैसास ने निर्माता के रूप में नरेंद्र मोदी, नानाजी देशमुख, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और राम मंदिर पर डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं.

बीबीसी के पास मौजूद एक कोर्ट आर्डर की कॉपी के मुताबिक़, निर्देशक का मेहनताना अदा नहीं करने की वजह से घैसासी क़ानूनी विवाद में उलझी हुई हैं.

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कोर्ट ने कहा कि ‘उन्हें डॉक्यूमेंट्री और काल्पनिक फ़िल्म के बीच का फ़र्क़ नहीं मालूम है.’

नरेंद्र पाठक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की महाराष्ट्र इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं.

उनके कार्यकाल के दौरान ही 2013 अगस्त में संगठन से जुड़े कुछ सदस्यों ने एफ़टीआईआई के छात्रों के साथ मारपीट की थी जिसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

मारपीट

फ़िल्म संस्थान के छात्रों ने कबीर कला मंच के कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिस वजह से यह मारपीट हुई थी.

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सोसाइटी के दूसरे दो सदस्य, अभिनेता प्रांजल सैकिया और मराठी फ़िल्म कलाकार राहुल सोलपुरकर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं.

संस्थान के पूर्व छात्र शैलेश गुप्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'शपथ मोदी की' नाम की एक फ़िल्म बना चुके हैं.

एफ़टीआईआई के रजिस्ट्रार उत्तम राव बोडके का कहना है कि जनवरी 2014 में छात्रों ने शराब के नशे में उनके साथ भी बुरा बर्ताव किया था.

शिकायतें

बोडके के मुताबिक़, दूसरे कई कर्मचारियों ने भी छात्रों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी. ये सभी शिकायतें अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेज दी गई हैं.

गजेन्द्र चौहान ने बीबीसी से कहा, ''छात्रों को इस मुद्दे को राजनैतिक रंग नहीं देना चाहिए और हड़ताल खत्म करके अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए.''

उन्होंने कहा, "कला की कोई विचारधारा नहीं होती और छात्रों पर कोई भी किसी तरह की विचारधारा नहीं थोपेगा."

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