नेताओं की जाँच के लिए अनुमति ज़रूरी नहीं

रघुबर दास

घूसखोरी को लेकर सुर्खियों में रहे झारखंड में भ्रष्टाचार पर नकेल के लिए सरकार ने निगरानी ब्यूरो को सशक्त करने का फैसला किया है.

निगरानी ब्यूरो का नाम अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एंटी करप्शन ब्यूरो) होगा. एसीबी किसी भी लोकसेवक को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ़्तार कर सकता है.

लोकसेवकों और जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं होगी.

इससे पहले, निगरानी ब्यूरो को जांच और सत्यापन के लिए मंत्रिमंडल एवं समन्वय विभाग से अनुमति हासिल करनी होती थी.

गृह सचिव एनएन पांडेय ने बताया कि मंगलवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में सरकार ने निगरानी ब्यूरो के बदले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के गठन और कार्यप्रणाली से संबंधित नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी है.

पूर्वानुमति ज़रूरी नहीं

अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भ्रष्टाचार से संबंधित सूचना जुटाने और सत्यापन के लिए भी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी.

इसके अलावा ट्रैप केस के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति लेना भी ज़रूरी नहीं होगा.

निगरानी के आरक्षी महानिरीक्षक मुरारी लाल मीणा ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का काम ज़्यादा प्रभावी होगा.

गृह सचिव के मुताबिक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, अगर सत्यापन के बाद मामला सही पाता है तो लोकसेवकों के स्तर के आधार पर मुकदमा दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति हासिल करेगा.

जनप्रतिनिधियों के लिए मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री, आईएएस, आईपीएस के मामले में मुख्य सचिव के साथ मुख्यमंत्री तथा द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले में निगरानी आयुक्त मुकदमे की अनुमति देंगे.

घोटाले के मामलों में कई राजनेता भी गए हैं जेल

मधु कोड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री
एनोस एक्का, पूर्व मंत्री (हत्या के मामले में अभी जेल में)
भानुप्रताप शाही, पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक (अभी जेल में)
हरिनारायण राय, पूर्व मंत्री
सीता सोरेन, विधायक
नलिन सोरेन, विधायक
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सरकार ने एसीबी को प्रभावी बनाने के लिए रांची, पलामू, दुमका, कोल्हान, धनबाद , हजारीबाग में एक- एक थाना स्थापित करने का फैसला लिया है. इसके प्रभारी डीएसपी स्तर के अफसर होंगे.

इसके साथ ही ब्यूरो में काम करने के लिए पदों की संख्या 350 से बढ़ाकर 608 किए जाएंगे.

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