दिगंबर कामत के पीछे पड़ी गोवा पुलिस

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Image caption गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत

गोवा पुलिस पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री दिगंबर कामत को लुई बर्जर रिश्वत केस में कथित तौर पर 'मुख्य षड्यंत्रकारी' ठहरा कर उनकी गिरफ़्तारी के लिए दबाब बना रही है.

उनकी अग्रिम ज़मानत का विरोध करते हुए पुलिस ने ये भी कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री 'आदतन नियमों का उल्लंघन करने वाले' रहे हैं.

पुलिस का ये भी कहना है कि शाह आयोग ने खनन घोटाले में भी उनका नाम लिया था.

गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, इस षड्यंत्र में पूर्व जनकल्याण मंत्री चर्चिल अलेमांव और एएम वाचासुंदर उनके साथी रहे.

वाचासुंदर जन आपूर्ति और सीवेज प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे जो करीब 1030 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट था.

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Image caption चर्चिल अलेमांव

रिश्वत

अलेमांव और वाचासुंदर को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है. पूर्व मंत्री अभी पुलिस हिरासत में हैं. निलंबित अधिकारी को भी न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है.

अब पुलिस दिगंबर कामत को भी गिरफ़्तार करना चाहती है.

पुलिस ने एक बार फिर विशेष अदालत को ये बताया कि पूर्व अधिकारियों और परामर्श साझेदारों ने कामत और अलेमांव को कितनी रिश्वत दी और बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री को दो मौकों पर 1.20 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई.

अपराध शाखा के सूत्रों का कहना है कि रिश्वत देने की बात को ना सिर्फ उन लोगों ने स्वीकार किया है जिन्होंने रिश्वत दी, बल्कि इसकी पुष्टि अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने भी की है.

जांच अधिकारियों ने उन आरोपियों को भी पकड़ा है जिन्होंने या तो जेआईसीए प्रोजेक्ट की मूल फाइलों को नष्ट कर दिया या फिर उन्हें छिपा दिया.

बताया जा रहा है कि ये फाइलें जनकल्याण विभाग और जेआईसीए प्रोजेक्ट के दफ्तर से ग़ायब कर दी गईं थीं.

अकूत संपत्ति

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इन लापता फाइलों को पाने के लिए भी पुलिस ने दिगंबर कामत की गिरफ़्तारी की भी बात की है.

इन फाइलों के सिलसिले में अलेमांव को गिरफ़्तार किया जा चुका है. साथ ही पुलिस ने कामत पर विशाल संपत्ति जमा करने का आरोप भी लगाया है. अपराध शाखा इस संपत्ति की जांच करने की भी योजना बना रही है.

जांच से कथित तौर पर पता चला है कि कामत ने इस पूरे प्रोजेक्ट को रोके रखा ताकि वाचासुंदर के ज़रिए वे परामर्शदाताओं पर रिश्वत देने के लिए दबाब बना सकें.

आरोप है कि प्रोजेक्ट डायरेक्टर वाचासुंदर इस पूरे मामले में कथित तौर पर बिचौलिए का काम कर रहे थे.

कामत पर ये भी आरोप है कि उन्होंने लुई बर्जर को दिया जाने वाला भुगतान चार माह तक रोके रखा, जब तक रिश्वत नहीं दी गई.

कामत की अग्रिम ज़मानत के आवेदन पर अब 12 अगस्त को सुनवाई होगी. तब तक उन्हें अंतरिम राहत दी गई है.

गोवा में ये पहला मामला है जिसमें मुख्यमंत्री के पद पर रहे राजनेता पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

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