विवादों का अखाड़ा बना महामंडलेश्वर पद

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दिल्ली के नज़दीक ग़ाज़ियाबाद में कथित तौर पर बीयर बार चलाने और ज़मीन के ख़रीद-फ़रोख़्त का कारोबार करने वाले सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाए जाने का फ़ैसला रद्द कर दिया गया है.

निरंजनी अखाड़े के प्रमुख स्वामी नरेंद्र गिरि ने बीबीसी को बताया, "संन्यासी बनने के बाद व्यक्ति अपने घर में नहीं रह सकता है. चार साधुओं की समिति ने जाँच में पाया कि सचिन दत्ता ने इस नियम का उल्लंघन किया है. इसलिए उनको महामंडलेश्वर बनाए जाने का फैसला निरस्त कर दिया गया है. अब सचिन महामंडलेश्वर नहीं हैं."

पर वे कुंभ मेले में एक संन्यासी की हैसियत से भाग ले सकते हैं. सचिन दत्ता को 31 जुलाई को इलाहाबाद में महामंडलेश्वर बनाया गया था.

'संन्यासी बना रहूंगा'

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निरंजनी अखाड़े ने विवाद की वजह से दत्ता के कुंभ में जाने और उनके शाही स्नान करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

हालाँकि अखाड़े के इस फ़ैसले से पहले ही सचिन दत्ता महामंडलेश्वर के पद से इस्तीफ़ा दे चुके थे.

इस पूरे विवाद पर सचिन दत्ता (स्वामी सच्चिदानंद) ने कहा, "मैंने महामंडलेश्वर पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. लेकिन अब मैं संन्यासी बन कर ही अपना जीवन बिताउंगा. मैं सही रास्ते पर चलना चाहता हूँ. अगर कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि मैं महामंडलेश्वर बना रहूँ तो कोई बात नहीं, मैं संन्यासी तो बन ही सकता हूँ."

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आरोपों पर सच्चिदानंद ने कहा, "लोग कह रहे हैं कि हमने अतीत में ग़लत किया, लेकिन क्या ग़लत किया, यह नहीं बताते."

यह पहली बार नहीं है कि किसी महामंडलेश्वर की उपाधि वापस ली गई है. इससे पहले मुंबई की राधे मां को जूना अखाड़े ने यह पदवी दी थी. वर्ष 2012 में उनके व्यवहार की वजह से पहले तो उनसे यह पदवी वापस ली गई, लेकिन जाँच के बाद उनको महामंडलेश्वर मान लिया गया था.

पहले किया था बचाव

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हाल ही में वो मुंबई में एक व्यक्ति की शिकायत के बाद फिर विवाद में आई हैं.

सचिन दत्ता को कुंभ के शाही स्नान में हिस्सा लेने की अनुमति के बारे में स्वामी नरेंद्र गिरि का कहना है कि कुंभ के शाही स्नान में हिस्सा लेने पर तभी पाबंदी लगती है जब किसी महामंडलेश्वर के चरित्र या व्यवहार पर प्रश्न चिह्न लगा हो.

नरेंद्र गिरी ने ही कुछ दिनों पहले सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाए जाने का बचाव करते हुए कहा था, "यदि कोई अपनी पिछली ज़िंदगी से, भोग विलास से ऊब गया हो तो वो जब चाहे संन्यास ले सकता है. यदि कोई सुधरने की कोशिश कर रहा है तो इसमें बुराई क्या है?”

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नरेंद्र गिरी ने इस पूरे विवाद के लिए मीडिया को दोषी ठहराया था. उन्होंने कहा था, "उस समय मीडिया नहीं था, वरना वाल्मीकि के बारे में भी लोग कहते कि देखो, डाकू और ख़ूनी को संत बना दिया."

देश में इस वक़्त 13 अखाड़े हैं, जिनमे महानिर्वाणी, जूना और निरंजनी अखाड़े धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. किसी भी कुंभ में महानिर्वाणी अखाड़े के बाद स्नान का मौका जूना और निरंजनी अखाड़े को ही मिलता है.

स्वामी नरेंद्र गिरि के मुताबिक़, इन अखाड़ों में एक से अधिक महामंडलेश्वर हो सकते हैं. उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर के बाद अखाड़े में दूसरा स्थान प्राप्त होता है. कुंभ के शाही स्नान में भाग लेने के लिए महामंडलेश्वर को रथ पर जाने का सम्मान दिया जाता है.

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