जीएसटी बिल आज पास करा पाएगी भाजपा?

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मोदी सरकार के पास गुड्स और सर्विसेज़ या वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में पारित कराने के लिए अब केवल दो दिन रह गए हैं.

बुधवार को राज्यसभा में इस पर एक बार फिर बहस होनी है. गुरुवार को संसद का मॉनसून सत्र नवंबर तक के लिए समाप्त हो जाएगा.

कांग्रेस का आक्रामक रुख बुधवार को भी जारी रहा तो सरकार की मुश्किलें बढ़ जाएँगी.

जीएसटी बिल की 7 अहम बातें

अगर सरकार इस बिल को पारित कराने में विफल रही तो अप्रैल 2016 तक इसे लागू करने का सरकार का वादा पूरा नहीं हो सकेगा.

अपना वादा निभाने के लिए अगले दो दिनों में ये बिल हर हाल में पारित होना चाहिए.

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जीएसटी बिल को लोकसभा ने पहले ही पारित कर दिया है.

इसे राज्यसभा से पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, क्योंकि इसके लिए संविधान में संशोधन की ज़रूरत है.

राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत नहीं है. इसके इलावा अगर राज्यसभा ने इसे पारित भी कर दिया तो देश के 29 राज्यों में से आधे से अधिक की मंज़ूरी भी चाहिए.

बिल को पारित कराने के बाद की प्रक्रिया भी काफ़ी लंबी है और सरकार के पास समय केवल दो दिन का है.

मंगलवार को राज्यसभा में ऐसा लगा कि बिल के विरोध में कांग्रेस अलहदा पड़ गई है. इसका साथ केवल लेफ्ट पार्टियां दे रही हैं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस विकास का विरोध कर रही है, लेकिन कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा का तर्क है कि उनकी पार्टी बिल के ख़िलाफ़ नहीं है. उनकी पार्टी चाहती है कि सरकार पहले उनकी मांगें पूरी करे.

इस्तीफ़े पर अड़ी कांग्रेस

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कांग्रेस सुषमा स्वराज, शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे के इस्तीफ़े की मांग कर रही है.

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अपने सभी सांसदों से कहा है कि वो संसद में तब तक हंगामा जारी रखें, जब तक विवादों में फंसे तीनों बीजेपी नेता यानी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान इस्तीफ़ा न दे दें.

इस बिल के जरिए देश के अंदर सामानों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए एक बार टैक्स देना होगा.

अलग-अलग राज्यों के ज़रिए लगाए गए टैक्स ख़त्म कर दिए जाएंगे.

लेकिन इसके लागू होने के बाद भी दो साल तक राज्य सरकारें एक प्रतिशत टैक्स वसूल कर सकती हैं.

इसके इलावा शराब और पेट्रोल को इससे अलग रखा गया है. यानी कांग्रेस ने जो सबसे पहले प्रस्ताव तैयार किया था उसकी तुलना में ये बिल थोड़ा कमज़ोर है.

जीडीपी में होगी वृद्धि?

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लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके पारित होने से देश का आर्थिक विकास तेज़ी से होगा, इसके सकल घरेलू उत्पाद में दो प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है और कंपनियों को 20 अलग-अलग टैक्स देने के बजाए एक टैक्स देना होगा.

बुधवार का दिन इस सरकार के लिए अहम साबित होगा. मोदी सरकार विकास के नारे पर चुनाव जीती है.

क्या सरकार जनता को यक़ीन दिला सकेगी कि कांग्रेस विकास विरोधी है और इसीलिए बिल को पारित होने से रोक रही है?

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