बॉम्बे हाइकोर्ट से तीस्ता को अग्रिम ज़मानत

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जानी मानी समाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद को बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत मिल गई है.

सीबीआई के मुताबिक़ तीस्ता और उनके पति पर ग़ैर सरकारी संस्था के ज़रिए विदेश से पैसे मंगाकर उन पैसों के दुरुपयोग के आरोप हैं.

सीबीआई के अनुसार तीस्ता को साल 2004 से 2008 के बीच अमरीका स्थित फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से दो लाख 90 हज़ार डॉलर यानी लगभग एक करोड़ 86 लाख रूपए मिले थे.

इस राशि के बारे में पूछताछ करने के लिए सीबीआई उन्हें गिरफ़्तार कर हिरासत में लेना चाहती है, लेकिन अदालत ने उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी.

अदालत ने तीस्ता को अग्रिम ज़मानत देने के साथ ही शर्त रखी की सीबीआई को जब भी ज़रूरत होगी तीस्ता और उनके पति को उनके दफ़्तर जाना होगा और मुंबई छोड़ने से पहले उन्हें सीबीआई को सूचित करना होगा.

अदालत में बहस

बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई में सरकारी वकील अनिल सिंह ने अदालत से फ़ॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफ़सीआरए) के उल्लंघन के सिलसिले में जाँच के लिए तीस्ता सीतलवाड़ को हिरासत में लेने की अनुमती माँगी.

तीस्ता सीतलवाड़ के वकील आस्पी चिनॉय ने सरकारी पक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि विदेशों से जो धनराशी तीस्ता सीतलवाड़ को प्राप्त हुई है, वह चंदा नहीं बल्की कुछ सेवाओं का भुगतान है, जिसपर आयकर भी चुकाया गया है.

चिनॉय का कहना था, ''हमने जाँच में पूरा सहयोग दिया है तथा अदालत में हर सुनवाई पर बराबर हाज़िर रहे हैं.''

इसके बाद अदालत ने सरकारी पक्ष से पूछा कि क्या उनके पास ऐसा कोई सबूत है जो यह साबित करे कि तीस्ता सीतलवाड़ ने जाँच में किसी भी समय कोई असहयोग किया है.

इस पर सरकारी पक्ष की तरफ़ से पुख़्ता सबूत पेश नहीं किए गए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों को ख़ारिज करते हुए तीस्ता सीतलवाड़ की 20,000 रुपये के बांड पर ज़मानत मंज़ूर कर ली.

गुजरात सरकार की शिकायत के बाद मोदी सरकार ने इसकी जांच सीबीआई के हवाले की थी.

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