समझौता धमाका: गवाह क्यों मुकर रहे हैं?

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समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में कुछ हद तक लगता है कि एक पैटर्न के तहत गवाह मुकर रहे हैं.

इस हादसे के मुख्य अभियुक्त असीमानंद की ज़मानत के ख़िलाफ़ अपील करने से सरकार ने इनकार कर दिया है.

इसे हम अलग करके नहीं देख सकते हैं. सरकार बदली है और इससे लोगों की उम्मीदें लगी हुई थीं.

कई मामलों से जुड़े लोगों का कहना भी था कि सरकार बदलने के बाद उनके प्रति रवैए में बदलाव आएगा.

सरकार के बदलने के साथ अचानक से गवाह मुकरने भी लगे.

पहले भी गवाह मुकरते रहे हैं, लेकिन एकदम से आठ-दस अहम मामलों में इतने सारे गवाहों का मुकरना एक राजनीतिक सवाल तो खड़ा करता ही है.

इनके ऊपर क्या राजनीतिक प्रभाव है, इनके क्या राजनीतिक संबंध है और ये एकदम से कैसे मुकर गए हैं.

राजनीतिक प्रभाव

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जिस तरह की बात कर रहे हैं कि कांग्रेस ने हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों को फंसाया है तो क्या उन्हें या सरकार को भारत की न्याय व्यवस्था पर यकीन नहीं है.

जब ऐसे मामले अदालत में विचाराधीन हो तब आप ये चीज़ें पहले ही कह देते हैं और गवाह मुकरना शुरू कर देते हैं.

यह सीधे-सीधे इसे एक राजनीतिक प्रभाव का सवाल बनाता है.

मालेगांव बम विस्फोट मामले में सरकारी वकील रोहिणी सालियां ने जो दबाव की बात कही है, वो उन्होंने सोच समझकर कहा है. वो एक अनुभवी वकील है.

उन्होंने इस मुद्दे का संप्रदायिकरण नहीं करने की भी सलाह दी है.

उन्होंने ख़ुद कहा है कि मैं एक हिंदू हूँ और मेरी दिलचस्पी इस मामले में सिर्फ़ न्याय पाने में है.

इसके बावजूद एनआईए का एक अधिकारी अगर उनसे आकर यह कह रहा है कि इस मामले में आप जरा धीरे जाइए और ज़्यादा ज़ोर नहीं लगाइए तो अंदेशा तो बिल्कुल साफ़ है.

यही समस्या गवाहों की ओर से भी हम देख रहे हैं.

बड़ा सवाल

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इन परिस्थितियों में एक पत्रकार के तौर पर बाहर से इसे देखें तो एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या इन मामलों को कभी न्याय मिलेगा?

पत्रिका 'कारवां' में असीमानंद का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है. 'कारवां' से बात करते हुए असीमानंद ने बिना किसी दबाव के और ये जानते हुए कि वे एक रिपोर्टर से बात कर रहे हैं, कई बड़े खुलासे किए हैं.

इस इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है लेकिन एनआईए एक बार संपर्क करने के बाद वे टेप लेने कभी नहीं आई है.

इस इंटरव्यू में उन्होंने समझौता एक्सप्रेस के साथ-साथ संघ और सरकार की कई बड़ी-बड़ी हस्तियों का भी जिक्र किया है.

उन्होंने तमाम मिलने वाली मददों के बारे में ऑन रिकॉर्ड कहा है.

एनआईए ने इस रिकॉर्ड से मिलने वाले किसी भी सुराग पर ध्यान देने की कोई कोशिश नहीं की है.

प्रभाव

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अगर इन मामलों में आरोपियों की रिहाई होती है तो इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव होंगे.

जब हम पाकिस्तान से कई मामलों में अपने कोर्ट की दलील पेश करते हैं और सबूत की मांग करते हैं तो वे अपने कोर्ट की बात करते हुए कहते हैं कि हमारे कोर्ट यह कह रहे हैं.

फिर हम उनकी बात पर यकीन नहीं करते हैं तो कल वो भी कह सकते हैं कि आपके यहां गवाह मुकर जाते हैं, आपके सरकारी वकील ऐसी बात कर रहे हैं तो हम कहां तक आपके न्याय का सम्मान करें.

यह सवाल तो उठेगा ही. जब तक हम अपने सिस्टम को पूरी तरह से पारदर्शी नहीं बनाते तब तक हम इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल नहीं कर पाएंगे.

मंगलवार को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हरीभाई चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी कि असीमानंद की ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए अपील नहीं करेगी.

फ़रवरी 2007 में समझौता एक्सप्रेस में हुए बम धमाके में कम से कम 68 लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे.

(वरिष्ठ पत्रकार हरतोष सिंह बल से बीबीसी संवाददाता शकील अख़्तर की बातचीत पर आधारित)

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