सेक्स मज़ेदार है अश्लील नहीं: अभय देओल

अभय देओल, प्रीति देसाई

अभिनेता अभय देओल के सेक्स को लेकर भारतीय समाज के नज़रिए पर लिखे गए फ़ेसबुक पोस्ट को सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है और कई लोग उसे शेयर कर रहे हैं.

अभय देओल ने लिखा है, "मुझे सेक्स में मज़ा आता है. मुझे इसकी चाहत होती है. मैं इस बात को छुपाता भी नहीं हूं."

पिछले सप्ताह मुंबई के एक होटल में पुलिस ने छापा मारकर कई जोड़ों को पकड़ा था और उनके मां-बाप को भी बुलाया था.

मुंबई पुलिस के इस क़दम की बड़ी आलोचना हुई थी और लोगों ने कहा कि सहमति से एक दूसरे के साथ वक़्त बिताते युवाओँ को पकड़ने का पुलिस को कोई अधिकार नहीं है.

मोरल पोलिसिंग क्यों?

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इस घटना के बाद अभय देओल ने फ़ेसबुक पर लिखा, "आपसी सहमति से एक दूसरे के साथ टाइम बिताने वाले युवाओं को पकड़ना, शारीरिक और मानसिक तौर पर उन्हें प्रताड़ित करना बेहद ग़लत है. मेरे ख़्याल से सेक्स नहीं बल्कि युवाओं को इस तरह से ज़लील करना अशोभनीय है. ऐसे माहौल में आप कैसे आज़ाद महसूस कर सकते हो. सेक्स कोई शर्म की बात नहीं है. इस देश में सेक्स के बारे में बात करना क्यों ग़लत माना जाता है. क्या ये वाक़ई अशोभनीय बात है."

अभय के इस पोस्ट को एक हज़ार से ज़्यादा बार शेयर किया जा चुका है.

उनके पोस्ट पर पूजा श्रीराम लिखती हैं, "अगर कोई लड़की अपनी मर्ज़ी के साथ बंद कमरे में सेक्स करती है तो किसी को क्यों आपत्ति होती है."

मर्ज़ी से सेक्स में गल़त क्या?

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एक अन्य फ़ेसबुक यूज़र पूनम सांगवान कहती हैं, "ये कैसा देश है जहां एक तरफ़ अपनी मर्ज़ी से सेक्स करना परंपरा के विरुद्ध है तो दूसरी तरफ़ लड़कियों को ज़बरदस्ती बलात्कारी से शादी के लिए मजबूर किया जाता है."

हिमाद्री कहती हैं, "जो लोग सेक्स का विरोध करते हैं उनसे पूछना चाहिए कि क्या वो नारियल फोड़ने से या मंत्रोच्चार से पैदा हुए."

शफ़ीक़ सैय्यद नाम के यूज़र ने भी अभय का समर्थन किया और कहा, "उम्मीद करते हैं कि इस देश में लोगों की व्यक्तिगत इच्छा का सम्मान होगा."

विरोध

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हालांकि कुछ लोगों ने अभय देओल का विरोध भी किया है, लेकिन ऐसे लोगों की तादाद बहुत कम है.

राना उस्मान कहते हैं, "जानवर मत बनो. हमारे देश और कल्चर को बर्बाद मत करो."

बिक्रमजीत सिंह कहते हैं, "सिर्फ़ पत्नी और पति के बीच ही सेक्स अच्छा होता है. किसी और के बीच नहीं होना चाहिए. बाक़ी आपकी मर्ज़ी."

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