नहीं हुआ मुंह मीठा, पर अमन की लौ रोशन

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स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर इस बार भारत और पाकिस्तान की सरहद पर मिठाई तो न ली गई और न दी गई, लेकिन अमन की आशा में मोमबत्तियां ज़रूर जलीं.

वाघा अटारी सरहद पर शुक्रवार की रात दोनों तरफ आए लोगों ने भारत-पाकिस्तान दोस्ती के नारों के बीच मोमबतिया जलाईं.

इन्हीं लोगों में शामिल पुष्पेंद्र ने कहा, “अगर पाकिस्तान अपने यहाँ तनाव बढ़ाने वालों को न रोक पाया तो इन मोमबत्तियां की रोशनी काम हो जाएगी.”

भारत के सीमा सुरक्षा बल ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के चलते दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस पर इस बार न तो मिठाई लेने और न देने का फ़ैसला लिया था.

क़ायम उम्मीद

पंजाब के गुरदासपुर और उसके बाद भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में हुए हमलों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है.

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लेकिन वाघा पर आए लोगों में से कुछ ने अब भी शांति की उम्मीद नहीं छोड़ी है.

सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा, “आंधी और तूफान में दिया जलाए रखना एक चुनौती होती है और एक दिए से हजाऱों दिए जलाए जा सकते है और आज जब दक्षिण एशिया दहशतगर्दी की चपेट मैं है तो चुनौती बढ़ जाती है और हमें दोस्ती की रोशनी जगाए रखनी है.”

लेकिन पुष्पेंद्र कहते हैं, “पाकिस्तान भारत के सबर का लगातार इम्तिहान ले रहा है, अगर उसने कश्मीर में दखलंदाजी बंद नहीं की, तो हम जैसे दोस्ती की बात करके वालों की कोशिशें इन मोमबत्तियां की कम हो रही रौशनी की तरह ख़त्म हो जाएंगी.”

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