'ठाकरे की याक़ूब से तुलना', पुलिस में शिकायत

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने तहलका पत्रिका के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

पार्टी के एक नेता और पूर्व विधायक बाला नांदगांवकर ने आरोप लगाया है कि तहलका की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में शिवसेना के नेता बाल ठाकरे की तुलना याक़ूब मेमन और अफ़ज़ल गुरु से की गई है.

मेमन 1993 के मुंबई बम धमकों के दोषी थे जबकि अफ़ज़ल गुरु भारतीय संसद पर हुए चरमपंथी हमले की साजिश रचने के दोषी पाए गए थे. दोनों को फांसी पर चढ़ा दिया गया था.

नांदगांवकर ने वेबसाइट के प्रकाशक, संपादक और विवादित लेख के लेखक के खिलाफ मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज़ कराई है.

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'चरमपंथियों से तुलना'

बीबीसी से बातचीत में नांदगांवकर ने कहा, "तहलका पाक्षिक की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख पढ़कर मैं आश्चर्यचिकत हूं. उस लेख में बालासाहब ठाकरे, प्रमोद महाजन और लालकृष्ण आडवाणी को चरमपंथी बताया गया है. यह सरासर ग़लत है और इससे हमारी भावनाओं को ठेस पहुंची है. लेख पढने के तुरंत बाद मैंने शिवाजी पार्क पुलिस थाने में तहलका पाक्षिक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ कराई है."

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पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक़, लेख में एक जगह हिंदुत्ववादी संगठनों की तुलना चरमपंथी गुटों से करते हुए कहा गया है कि बम धमाके करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है या फांसी पर चढ़ाया जाता है, लेकिन हिंदुत्व के नाम पर दंगे कराने वालों का मृत्यु के बाद सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है.

लेख में यह भी कहा गया हैं कि याक़ूब मेमन और अफ़ज़ल गुरु का दोष साबित करने के लिए ज़रूरी पुख़्ता सबूत नहीं होते हुए भी उन्हें फांसी दे दी गई.

'सुप्रीम कोर्ट की अवमानना'

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नांदगांवकर ने कहा, "यह देश की सरकार के प्रति गंभीर अविश्वास और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है. इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए."

बीबीसी ने इस शिकायत पर पुलिस का पक्ष जानने के लिए मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी धनंजय कुलकर्णी से कई बार संपर्क करने की कोशिश की. पर उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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