एफ़टीआईआई: 'आग में घी डाल रहे हैं केजरीवाल'

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पिछले 69 दिनों से हड़ताल कर रहे एफ़टीआईआई के छात्रों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक नई पेशकश की है.

केजरीवाल ने ट्विटर पर कहा है, "एफ़टीआईआई के छात्रों को मेरी पेशकश- दिल्ली सरकार आपको अस्थायी रूप से जगह मुहैया कराएगी. जब तक केंद्र सरकार राजी न हो आप यहां अपनी कक्षाएं कर सकते हैं."

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केजरीवाल का कहना है- "एफ़टीआईआई में जो कुछ भी हो रहा है उसे देख कर मैं दुखी हूं. विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त एक संस्थान को व्यवस्थित तरीक़े से सरकार और उसके ग़लत फैसले तबाह कर रहे हैं."

केजरीवाल ने छात्रों के न केवल जगह देने का न्योता दिया है बल्कि कहा है कि अगर केंद्र सरकार नहीं मानी तो अस्थायी जगह को एक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि छात्र यहां पढ़ाई कर सकें.

न्योते का स्वागत

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केजरीवाल के इस न्यौते का विशाल ददलानी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है, "ये बढ़िया है, एफ़टीआईआई के छात्रों को समर्थन देने के लिए उनका शुक्रिया."

इस आमंत्रण पर शेखर गुप्ता ने कहा, "छात्रों को यहां क्लास करने के लिए कहने की बजाय केजरीवाल को दिल्ली में एक आधुनिक और स्वायत्त फ़िल्म संस्था बनानी चाहिए जो एफ़टीआईआई के साथ कंपीट कर सके."

इसके जवाब में केजरीवाल ने कहा है कि वे इस पर विचार कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा छिड़ी हुई है. कई लोग इस पर उनसे ख़फा नज़र आते हैं.

सुहाग पटेल कहते हैं, "दिल्ली में बिजली और पानी की समस्या है, लेकिन केजरीवाल को एफ़टीआईआई के ड्रामे में ही दिलचस्पी है."

साराक्षी राय कहती हैं, "अरविंद केजरीवाल जलती आग में घी डाल रहे हैं."

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शशि शेखर के कहना है, "अगर मुख्यमंत्री एफ़टीआईआई के छात्रों को अपनाना ही चाहते हैं तो भारत के करदाता के पैसों को बख़्श दें."

विनोद शर्मा का कहना है, "केजरीवाल के साथ मैं सहमत हूं. एफ़टीआईआई के छात्रों के लिए ख़ुद इन मास्टर के सिवा कौन बेहतर ड्रामा और एक्टिंग सिखा सकता है."

गिरफ़्तारी की आलोचना

जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर केजरीवाल का न्यौता छाया हुआ है, छात्रों की गिरफ़्तारी पर भी काफी चर्चा हो रही है. हैशटैग #FTII ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है और लोग इस गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे हैं.

मधुरिका सोना जैन कहते हैं, "मुबारक हो सरकार, आप भारत के सबसे बढ़िया फ़िल्म स्कूल को तबाह करने में कामयाब रहे."

राना आयूब पूछतीं है, "क्या यह गणतंत्र है?"

राजेश मित्तल कहते हैं, "लगता है हम ब्रिटिश राज में जी रहे हैं तभी तो #FTII के विधार्थीयों को आधी रात पुलिस ने गिरफ्तार किया, सुबह तक का इंतजार भी नहीं किया."

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नीलेश मिश्रा कहते हैं, "पहले आप एक अहमक को एक नामी संस्था के मुखिया के रूप में नियुक्त करते हैं, फिर आप छात्रों पर ज़ुल्म करते हैं. हठ की हद."

पूरे मामले पर एक नज़र

मंगलवार आधी रात के बाद पुणे पुलिस ने एफ़टीआईआई के पांच छात्रों को गिरफ्तार किया है. इन पर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करना, ग़ैरक़ानूनी रूप से एकत्र होना, दंगा करना, सरकारी काम में हस्तक्षेप करना और संस्थान के निदेशक प्रशांत पाठराबे को उनके आफिस में बंद रखने के आरोप लगाए गए हैं.

छात्र अभिनेता गजेंद्र चौहान को संस्था का चेयरमैन बनाए जाने के ख़िलाफ़ 69 दिनों से हड़ताल पर रहे है. सोमवार को इन्होंने 2008 बैच की मूल्यांकन प्रक्रिया का विरोध किया था.

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