ये है भारत का सबसे गंदा शहर

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

मध्यप्रदेश का दमोह शहर देश का सबसे गंदा शहर माना गया है.

शहरी विकास मंत्रालय ने देश भर में एक लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों का सर्वे किया था जिसमें सबसे आख़िरी पायदान यानि 476 नंबर पर रहा दमोह शहर.

उन्तालिस वार्ड वाले दमोह में हर दिन क़रीब 18 टन कचरा निकलता है जबकि शहर में सफ़ाई के काम के लिए 261 कर्मचारी हैं. नगर पालिका 100 कर्मचारी और बढ़ाना चाहती है.

बुंदेलखंड के इस शहर में अगर आप जाएं तो कुछ जगहों पर वाकई महसूस होगा कि सफ़ाई इस यहां की नगरपालिका के लिए आख़िरी प्राथमिकता है.

खुले में शौच बड़ी समस्या

नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी सुधीर कुमार सिंह का कहना है, "इस सर्वे में दो बिंदुओं को लिया गया, जिनकी वजह से शहर सबसे गंदा शहर कहा गया."

इमेज कॉपीरइट AFP

सुधीर कुमार सिंह कहते हैं, “खुले में शौच और शहर के क़रीब मौजूद ट्रेंचिग ग्राउंड की वजह से हमें कम नंबर दिए गए और हमारे शहर को सबसे गंदा शहर माना गया.”

वह कहते हैं, "शहर में हर घर में शौचालय मौजूद है. इसके बावजूद अपनी आदत के चलते लोग खुले में शौच करना पसंद करते हैं."

शहर के पूरे कचरे को एक ग्राउंड में डाल दिया जाता है. हालांकि इसके लिए शहर को अब नई जगह मिल गई है.

इसके अलावा कचरे से निपटने के लिए शहर के पास फिलहाल कोई योजना नज़र नहीं आती.

इमेज कॉपीरइट S NIAZI

स्थानीय निवासी 27 साल के मोहम्मद नोमान रज़ा दमोह कहते हैं कि जबसे उन्होंने होश संभाला है तब से वह शहर में गंदगी देख रहे हैं.

वह कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि आने वाले अगले चंद सालों में स्थिति में कोई बदलाव आएगा. राजनेता सिर्फ़ पैसा कमाने में लगे हैं और उन्हें आम लोगों से कुछ लेना-देना नहीं है. यही वजह है कि आज शहर की यह हालत है.”

लगभग डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर के विधायक मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री हैं, जो पिछले 12 सालों से लगातार मंत्री हैं. लेकिन इस शहर में गंदगी को लेकर हर किसी के अपने तर्क हैं.

बस स्टैंड

इमेज कॉपीरइट S NIAZI

शहर के बस स्टैंड की स्थिति ऐसी है कि कोई चंद मिनट भी खड़ा न हो सके. चारों ओर गंदगी के अलावा, बस स्टैंड में न तो महिलाओं के लिए और न ही पुरुषों के लिए शौचालय है.

बस स्टैंड पर काम करने वाले बंटी कुरैशी बताते हैं, “गंदगी में जो स्थान दमोह को दिया गया है, वो बिल्कुल सही है. पानी गिरने के कारण बस स्टैंड पूरी तरह से दलदल बना हुआ है. कोई सुनने वाला नहीं है. हम बस बोल ही सकते हैं और कुछ नहीं कर सकते.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार