उपहार कांड: सज़ा पर और बहस की अनुमति नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने उपहार अग्निकांड मामले में सीबीआई की उस याचिका को ठुकरा दिया है, जिसमें अंसल बंधुओं को जेल भेजने की अपील करते हुए बहस के लिए और समय की मांग की गई थी.

अदालत ने कहा कि वो अंसल बंधुओं के मामले में फ़ैसला सुना चुका है.

तीन सदस्यीय बेंच की अगुआई कर रहे जस्टिस एआर दवे ने कहा, "ये उचित नहीं होगा. हमने पहले ही फ़ैसला सुना दिया है."

सीबीआई के वकील हरीश साल्वे ने इस मामले में कुछ बिंदुओं पर बहस के लिए 15 मिनट की मांग की थी.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये ज़रूर कहा कि सीबीआई इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकती है.

अग्निकांड

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13 जून 1997 में हुए दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोग मारे गए थे. उस समय सिनेमाघर में काफ़ी भीड़ थी और फ़िल्म बॉर्डर दिखाई जा रही थी.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि अंसल बंधु सुशील और गोपाल अंसल जेल नहीं जाएँगे. लेकिन अंसल बंधुओं पर 60 करोड़ का जुर्माना ज़रूर लगाया गया था.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को आपराधिक अनदेखी का दोषी पाया था और कहा था कि वे अपने उपभोक्ताओं की सुरक्षा से ज़्यादा पैसा बनाने में लगे हुए थे.

लेकिन सज़ा की अवधि को लेकर जजों में मतभेद थे. वर्षों से चल रहे इस मामले में अंसल बंधुओं को कुछ ही महीने जेल में बिताने पड़े हैं.

सुशील अंसल ने पाँच महीने से कुछ ज़्यादा और गोपाल अंसल ने चार महीने से कुछ ज़्यादा समय जेल में बिताए हैं.

इस मामले को लेकर अभियान चला रहीं नीलम कृष्णमूर्ति ने अदालत के फ़ैसले पर निराशा जताई थी. नीलम का एक बेटा और एक बेटी इस अग्निकांड में मारे गए थे.

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